भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करने कि मांग के साथ 13 सूत्री मांगों पर किसान महासभा ने किया विरोध

Kisan Mahasabha protests over 13-point demands, including the demand for cancellation of the India-US agricultural trade agreement.

भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करने कि मांग के साथ 13 सूत्री मांगों पर किसान महासभा ने किया विरोध
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पटना, 09 फरवरी 2026ः आज अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य व्यापी आह्वाहन पर किसानों ने भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करने की मांग के साथ 13 सूत्री मांगों पर राज्य भर के तमाम जिला व प्रखंड कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शनों व धरना के माध्यम से आवाज बुलंद की और मुख्यमंत्री बिहार को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भेजा।

इस आशय की रिपोर्ट पटना में जारी करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य सचिव सह राष्ट्रीय सचिव उमेश सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्यों की सरकारें किसानों,मजदूरों व गरीबों के हितों के पक्ष में बने अब तक के सभी कानूनों को कॉर्पोरेट के पक्ष में लगातार बदलने यहां तक कि खत्म कर देने की कोशिश कर रही है ।इसी के तहत भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता कर न सिर्फ भारतीय कृषि और किसानों को अमेरिकी कंपनियों के हाथों गिरवी कर दिया है बल्कि देश की संप्रभुता को भी गिरवी कर दी है।

उन्होंने कहा कि पहले तीन काले कृषि कानूनों के जरिय कृषि व कृषि उत्पाद को लूट लेने की कोशिश की गई ।मजदूरों के पक्ष में बने अब तक के 44 कानूनों को समेट कर चार श्रम संहिता के जरिय मजदूरों को कॉर्पोरेट गुलाम बना देने की कोशिश और अब V B GRAM G के जरिय मनरेगा को खत्म कर देने, चोर दरवाजे से कृषि भूमि अधिग्रहण कानून,खाद्य सुरक्षा कानून किसान सम्मान निधि में संशोधन किया जा रहा है या उलझा कर उससे लोगों को वंचित किया जा रहा है। हमारी खेती में सरकारी पूंजी निवेश को खत्म कर उसे घाटे का काम बना दिया गया ताकि किसान खेती छोड़ दें और खेत खेती कॉर्पोरेट के पक्ष में लूट कर ली जाए।

उन्होंने कहा कि जब तक खेत खेती किसानों के हाथ में है और जंगल पहाड़ आदिवासियों के संरक्षण में है तब तक ही खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण की सुरक्षा की गारंटी रही। लेकिन जैसे ही सरकारों की नीतियों के चलते खेत, खेती, फसल और जल, जंगल , पहाड़ का कॉर्पोरेट अधिग्रहण शुरू हुआ कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संकटग्रस्त हो गए हैं आज इसे बचाने की जरूरत है इसके लिए हम किसानों को सड़क पर न सिर्फ उतरना होगा बल्कि संघर्ष को तेज करते हुए इन सरकारों को चुनौती देनी होगी। उन्होंने कहा कि किसान भारी आक्रोश में हैं और संघर्ष का बिगुल फूंक चुके हैं यह आज के राज्य भर में हुए धरना प्रदर्शनों में दिखा। खेती के व्यस्त मौसम के बावजूद राज्य भर में हज़ारों किसान सड़क पर उतरे।

उन्होंने कहा कि आज के इस राज्य व्यापी कार्यक्रम में भारत - अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करने की मांग के अलावा कृषि भूमि अधिग्रहण व उसके लूट बंद करो! कदवन डैम( इंद्रपुरी जलाशय) का यथाशीघ्र निर्माण कराओ! संपूर्ण खेती को सिंचित करो! VB GRAM G को रद्द करो मनरेगा को पुनर्बहाल करो! चार श्रम संहिता (श्रम शक्ति कानून 2025) को वापस लो! बीज विधेयक 2028 को वापस लो! विद्युत विधेयक 2028 वापस लो ! कृषि विपणन पर नए राष्ट्रीय प्रस्ताव वापस लो! भौतिक सत्यापन के जरिय सभी किसानों को कृषि भूमि का और गरीबों को वास भूमि का कागजात मुहैया कराते हुए उनके पंजीकरण कर कृषि में मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान करो! सी टू प्लस पच्चास प्रतिशत एमएसपी की कानूनी गारंटी के साथ सभी फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी करो! 60 वर्ष उम्र पूरा कर चुके सभी किसानों को 10000 रुपया मासिक पेंशन दो! आदि मांग प्रमुखता से उठाए गए।

उन्होंने बताया कि आज का कार्यक्रम पटना जिला के पुनपुन,धनरूआ,दुल्हिनबाजार, मसौढ़ी में;भोजपुर जिला के आरा,पिरो,जगदीशपुर, संदेश, सहार, तरारी, अगिआंव में; रोहतास जिला के शिवसागर,चेनारी, अकोढी गोला, गोरारी (काराकाट),नासरीगंज, दिनारा,करहगर, दावथ,तिलौथू,संझौली,विक्रमगंज; कैमूर जिला में भभुआ; अरवल जिला में वंशी ,कलेर,अरवल में; औरंगाबाद जिला में औरंगाबाद और दाउदनगर प्रखंड पर; जहानाबाद जिला में जिलाधिकारी के यहां; नालंदा जिला में हिलसा अनुमंडल पर; शेखपुरा जिला में अरियरी प्रखंड पर; गोपालगंज जिला के भोरे प्रखंड पर; सिवान जिला में जिलाधिकारी के यहां; वैशाली जिला में राजापाकड़, लालगंज, हाजीपुर, विदुपुर; समस्तीपुर जिला में समस्तीपुर,पूसा,ताजपुर,उजियारपुर,विभूतिपुर,सरायरंजन प्रखंडों पर; दरभंगा जिला में जिलाधिकारी के यहां; बेगूसराय जिला में जिलाधिकारी के यहां; खगड़िया जिला में बेलदौर में; पूर्णिया में जिलाधिकारी के यहां कार्यक्रम हुआ। इस तरह से बिहार के 18 जिलों में कुल 48 स्थानों पर जिसमें सबसे अधिक रोहतास जिला में 11 स्थानों पर यह कार्यक्रम हुआ और काफी प्रभावशाली रहा।

पटना से कुमार गौतम की रिपोर्ट