Census 2027:बिहार में जनगणना की तारीख तय क्यों जरूरी है अरबों खर्च कर सेंसस, जानिए पूरा शेड्यूल

बिहार में जनगणना 2027 का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। यह प्रक्रिया दो चरणों में 45 दिनों तक चलेगी, जिसमें मकान सूचीकरण और घर-घर सर्वे शामिल है। जनगणना पर केंद्र सरकार 11,718 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इससे सरकारी योजनाओं, बजट बंटवारे और परिसीमन में मदद मिलेगी।

Census 2027:बिहार में जनगणना की तारीख तय क्यों जरूरी है अरबों खर्च कर सेंसस, जानिए पूरा शेड्यूल
Image Slider
Image Slider
Image Slider

पटना| बिहार में जनगणना 2027 की तैयारियों का आधिकारिक आगाज़ हो गया है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने जनगणना की तारीखों की घोषणा करते हुए बताया कि यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में कुल 45 दिनों तक चलेगी। जनगणना का संचालन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत गठित जनगणना कोषांग द्वारा किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य की शहरी और ग्रामीण आबादी से जुड़ा सटीक और पारदर्शी डेटा तय समय में इकट्ठा किया जाए।राज्य में होने वाली इस जनगणना के तहत सभी 265 शहरी और 534 ग्रामीण प्रशासनिक इकाइयों को कवर किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिक आंकड़ों से बाहर न रह जाए। जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

 दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया

जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में मकानों का सूचीकरण और बुनियादी ढांचों की गणना की जाएगी। पहले चरण की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 से होगी, जो 1 मई 2026 तक चलेगी। इसमें आवासीय स्थिति, भवनों की संख्या और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।

दूसरा और सबसे अहम चरण 2 मई से 31 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की विस्तृत जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें उम्र, लिंग, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े तथ्य शामिल होंगे। सरकार ने समयबद्ध तरीके से डेटा प्रोसेसिंग का लक्ष्य तय किया है।

 सरकार जनगणना क्यों कराती है?

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत देश में हर 10 साल में जनसंख्या से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जुटाना अनिवार्य है। जनगणना का उद्देश्य देश के जनसांख्यिकीय ढांचे को समझना है। इससे यह पता चलता है कि देश में कितने पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हैं, साथ ही साक्षरता, रोजगार, जाति और धर्म से जुड़ा डेटा भी सामने आता है। यही आंकड़े सरकार की नीतियों और योजनाओं की नींव बनते हैं।

 जनगणना से क्या-क्या फायदे होते हैं?

  • शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाओं की बेहतर प्लानिंग
  • केंद्र और राज्यों के बीच बजट का न्यायसंगत बंटवारा
  • लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन
  • SC-ST वर्ग के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं
  • निजी कंपनियों को निवेश और बाजार आकलन में मदद

 जनगणना 2027 पर कितना खर्च होगा?

जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने कुल 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय बजट 2026-27 में शुरुआती कार्यों के लिए 6,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं बिहार सरकार ने अपने बजट में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के लिए 2,190 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

गौरतलब है कि भारत में पिछली पूर्ण जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। अब 2027 की जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाने की भी तैयारी की जा रही है।