मोतीबाग में बायो-माइनिंग से बदलेगी किशनगंज की तस्वीर, कचरे के पहाड़ से मिलेगी स्थायी राहत
बायो-माइनिंग के तहत प्लास्टिक, पॉलीथिन, रबर और अन्य सूखे अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग किया जा रहा है। छांटे गए प्लास्टिक और अन्य उपयोगी अपशिष्ट को रिसाइक्लिंग और सुरक्षित निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है, ताकि पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।
KISHANGANJ : किशनगंज शहर में वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ से अब राहत की उम्मीद जगी है। नगर परिषद की ओर से मोतीबाग इलाके में बायो-माइनिंग का काम तेज़ी से किया जा रहा है। यहां लंबे समय से डंप किए गए सूखे कचरे की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई शुरू कर दी गई है।
मोतीबाग का यह डंपिंग यार्ड लंबे समय से पर्यावरण और आसपास के इलाकों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ था। बदबू, प्रदूषण और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा था। अब नगर परिषद की पहल से इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
नगर परिषद के अनुसार, करीब 1 करोड़ 31 लाख रुपये की लागत से मोतीबाग में बायो-माइनिंग परियोजना चलाई जा रही है। इस प्रक्रिया में मशीनों और मजदूरों की मदद से वर्षों से जमा सूखे कचरे की छंटाई की जा रही है।
बायो-माइनिंग के तहत प्लास्टिक, पॉलीथिन, रबर और अन्य सूखे अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग किया जा रहा है। छांटे गए प्लास्टिक और अन्य उपयोगी अपशिष्ट को रिसाइक्लिंग और सुरक्षित निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है, ताकि पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।
नगर परिषद का कहना है कि बायो-माइनिंग के बाद इस डंपिंग यार्ड की जमीन को साफ कर दोबारा उपयोग के लायक बनाया जाएगा। इससे न सिर्फ पर्यावरण को राहत मिलेगी, बल्कि शहर की तस्वीर भी बदलेगी।
मोतीबाग में चल रहा यह बायो-माइनिंग कार्य किशनगंज को कचरे की गंभीर समस्या से निजात दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होती है या नहीं।
किशनगंज से हर्ष कुमार की रिपोर्ट
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