“सिर्फ इस्तेमाल नहीं, भूगर्भ जल को रिचार्ज करना भी जरूरी”: मंत्री संतोष कुमार सुमन ने लघु जल संसाधन विभाग की कार्यशाला में दिया संदेश

पटना में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में माननीय मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि जल केवल उपयोग के लिए नहीं, बल्कि भूगर्भ जलस्तर को रिचार्ज करने के लिए भी संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वर्ष 2019-20 में शुरू किए गए जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से सूखाड़ क्षेत्रों में भूजल संरक्षण के प्रयास कर रही है। कार्यशाला में एक्विफर की पहचान, कृत्रिम पुनर्भरण तकनीक, जल उपयोग दक्षता और सतत भूजल प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने चेताया कि वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत चीन और अमेरिका से आगे है, और भूगर्भ जलस्तर के रिचार्ज पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

“सिर्फ इस्तेमाल नहीं, भूगर्भ जल को रिचार्ज करना भी जरूरी”: मंत्री संतोष कुमार सुमन ने लघु जल संसाधन विभाग की कार्यशाला में दिया संदेश
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पटना,30 जनवरी 2026: प्रकृति का बहुमूल्य तोहफा पानी है। इसका जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। आज देश और बिहार के कुछ हिस्सों में जल संकट की समस्या खड़ी हो चुकी है। हमें चाहिए कि जल के दोहन के अनुपात में भूगर्भ जलस्तर को रिचार्ज करें, ताकि आने वाले समय में हम कुदरत के सबसे कीमती चीज को पीढ़ियों को सौंप सकें। यह बात शुक्रवार को लघु जल संसाधन विभाग के माननीय मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन ने कही। वह विभाग की ओर से पटना स्थित तारामंडल सभागार में आयोजित एक दिवसीय जलभृत का विकास (डेवलपमेंट ऑफ एक्यूफर) विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में उत्पन्न होने वाली संकट के प्रति पहले से सचेत है। यही वजह है कि वर्ष 2019-20 में जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारंभ किया गया। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अभियान की सफलता और उसके दूरगामी परिणाम को देखते हुए आगामी पांच सालों के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका तय कर दी है। श्री सुमन ने कहा कि सूखाड़ क्षेत्र में आने वाले जिलों में लघु संसाधन विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है। बिहार में भूगर्भ जलस्तर के रिचार्ज करने की कवायदों और सफलताओं को आने वाले समय में देश-दुनिया याद रखेगा। विभागीय मंत्री ने इंजीनियर और अधिकारियों से कहा कि उपयोगिता के हिसाब से ही योजनाओं को लागू किया जाए। 

इस अवसर पर लघु जल संसाधन विभाग के सचिव श्री बी. कार्तिकेय धनजी ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है। यहां तीन फसलों की खेती की जाती है। खेती में सिंचाई का बड़ा महत्व है। हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि भूगर्भ जल की कम खपत होने वाली तकनीकों और फसलों को बढ़ावा दें। इस क्रम में उन्होंने दरभंगा और दूसरे जिलों में लिफ्ट इरिगेशन की सफलताओं से भी लोगों को रूबरू किया। सचिव ने कहा कि भूगर्भ जलस्तर की आगामी 200 सौ साल के भविष्य को देखते हुए जल का सही इस्तेमाल किया जाय। कुछ साल पहले राज्य में शुरू परियोजनाओं के फलस्वरूप ही भूगर्भ जलस्तर में सुधार हुआ है। इसे भविष्य में भी बरकरार रखने की जरूरत है। कार्यशाला में एक्विफर की पहचान, भूजल सम्भाव्यता आकलन, कृत्रिम पुनर्भरण तकनीक, जल संरक्षण उपाय, जल उपयोग दक्षता, डेटा आधारित योजना निर्माण और सतत भूजल प्रबंधन आदि विषयों पर चर्चा की गई।

वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत चीन और अमेरिका से आगे

लघु संसाधन विभाग के इस कार्यशाला में अभियंता प्रमुख सुनील कुमार ने पीपीटी के माध्यम से राज्य में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति और जलस्तर को रिचार्ज करने वाली परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। सेंट्रल वॉटर बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. दीपांकर साहा ने बिहार और दूसरे राज्यों में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बिहार के कुछ जिलों को छोड़ दिया जाय तो यहां भूगर्भ जलस्तर काफी ठीक है। भविष्य की समस्याओं से निपटने की दिशा में कारगर तरीकों के प्रति भी लोगों को उन्होंने जागरूक किया। कहा कि दोहन के अनुपात में भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज नहीं किया जा रहा। इस वजह से कई राज्य क्रिटिकल श्रेणी में आ चुके हैं। साहा ने कहा कि वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत चीन और अमेरिका जैसे देश से भी आगे है। भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज करने के लिए ठोस कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भूगर्भ जलस्तर के तेजी से गिरने के पीछे प्रमुख वजह खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले जल पर नियंत्रण नहीं किया जाना है। कार्यशाला में सेंट्रल वाटर बोर्ड,  मध्य पूर्वी क्षेत्र पटना के क्षेत्रीय निदेशक राजीव रंजन शुक्ला, लघु संसाधन विभाग की अपर सचिव संगीता कुमारी, एनआइटी पटना से एसोसिएट प्रोफेसर रोशनी, पटना यूनिवर्सिटी से भावुक शर्मा, आईआईटी पटना से ओम प्रकाश, स्कॉलर, व्याख्याता और प्राध्यापक आदि मौजूद रहे।