स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, मरीजों को प्राइवेट अस्पताल जाने की नहीं पड़ेगी जरुरत!
बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही गड़बड़ियों पर अब लगाम लगने वाली है। मरीजों को बहला-फुसलाकर प्राइवेट अस्पतालों और लैब्स में भेजने वाले दलालों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर मामले को लेकर सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे दलालों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को किसी भी तरह से गुमराह न किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग को लगातार ऐसी गंभीर शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ संगठित दलाल सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के भीतर और आसपास खुलेआम सक्रिय हैं। ये दलाल इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को सरकारी व्यवस्था पर अविश्वास पैदा कर बेहतर और त्वरित इलाज का झांसा देते हैं, फिर उन्हें निजी अस्पतालों में ले जाकर मोटा कमीशन कमाते हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि मरीजों को जानबूझकर डराया जाता है कि सरकारी अस्पताल में सही इलाज संभव नहीं है, जिससे मजबूरी में वे निजी संस्थानों की ओर रुख कर लेते हैं।
शिकायतों के मुताबिक ये दलाल सिर्फ अस्पताल तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जांच और दवाओं के नाम पर भी मरीजों का शोषण किया जा रहा है। मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं के बावजूद निजी लैब में जांच कराने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, कुछ चुनिंदा मेडिकल दुकानों से ही दवा खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जो अक्सर अस्पताल परिसर के बाहर स्थित होती हैं। इससे न सिर्फ मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की साख को भी नुकसान पहुंचता है।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में इस तरह की गतिविधियां किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे दलालों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित करें और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। विभाग का मानना है कि जब तक इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
Divya Singh