रिश्वतखोरी पर सरकार का बड़ा प्रहार: डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के सख्त आदेश से हड़कंप, घूसखोर राजस्व कर्मचारी सस्पेंड, बर्खास्तगी तय

अररिया के नरपतगंज अंचल में परिमार्जन के नाम पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए राजस्व कर्मचारी मो. इम्तियाज आलम को डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के निर्देश पर तत्काल निलंबित कर दिया गया है। निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद अब उसकी सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

रिश्वतखोरी पर सरकार का बड़ा प्रहार: डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के सख्त आदेश से हड़कंप, घूसखोर राजस्व कर्मचारी सस्पेंड, बर्खास्तगी तय
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 Bihar News:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का रुख अब और सख्त होता दिख रहा है। अररिया जिले के नरपतगंज अंचल में परिमार्जन के नाम पर रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए राजस्व कर्मचारी मो. इम्तियाज आलम के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के स्पष्ट निर्देश पर जिला समाहर्ता, अररिया ने आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही विभाग ने उसकी सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी तेज कर दी है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

कैसे उजागर हुआ रिश्वत का खेल?

यह मामला नरपतगंज अंचल के फरही पंचायत का है, जहां रामघाट वार्ड संख्या 14 निवासी किसान कमलेश्वरी यादव ने राजस्व कर्मचारी मो. इम्तियाज आलम पर गंभीर आरोप लगाए। किसान के अनुसार, जमीन परिमार्जन के नाम पर कर्मचारी ने पहले भी अवैध राशि की मांग की थी। किसान द्वारा पैसे देने के बावजूद काम नहीं किया गया। इसके बाद आरोपी कर्मचारी ने दोबारा 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर डाली।किसान जब लगातार शोषण से परेशान हो गया तो उसने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई में पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए निगरानी विभाग ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

15 हजार लेते ही रंगेहाथ गिरफ्तारी

मंगलवार की शाम फरही पंचायत की कचहरी में जैसे ही किसान ने तय रकम 15 हजार रुपये राजस्व कर्मचारी को सौंपी, वैसे ही पहले से मौजूद निगरानी विभाग की टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके पर ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। बाद में आरोपी को पूछताछ के लिए पटना लाया गया, जहां उससे आगे की जांच जारी है।

सरकार का जीरो टॉलरेंस एक्शन

मामले की जानकारी मिलते ही उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आरोपी कर्मचारी को न केवल निलंबित किया जाए, बल्कि सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाए। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का कड़ा बयान

उपमुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि“राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। किसानों और आम नागरिकों के काम समय पर, पारदर्शी और बिना किसी अवैध लेन-देन के होने चाहिए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता एक भ्रष्टाचारमुक्त राजस्व प्रशासन स्थापित करना है और इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

किसानों में भरोसा,अफसरों में खौफ

इस कार्रवाई के बाद जहां एक ओर किसानों और आम लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्ट मानसिकता वाले कर्मियों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रही, तो जमीन से जुड़े कामों में लंबे समय से चली आ रही रिश्वतखोरी पर लगाम लग सकती है।

साफ संदेश:अब नहीं चलेगी घूसखोरी

सरकार के इस एक्शन से यह संदेश बिल्कुल साफ है कि बिहार में अब रिश्वतखोरी करने वालों की कोई जगह नहीं है। चाहे कर्मचारी छोटा हो या बड़ा अधिकारी—यदि भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया, तो कार्रवाई तय है।यह मामला न सिर्फ अररिया बल्कि पूरे राज्य के लिए नज़ीर बनकर सामने आया है, जहां सरकार ने दिखा दिया है कि भ्रष्टाचार पर अब नो मर्सी नीति लागू है।