सरकारी आदेश बेअसर! ऑफलाइन भू-लगान वसूली ने खोली सिस्टम की पोल

सरकारी आदेश बेअसर!  ऑफलाइन भू-लगान वसूली ने खोली सिस्टम की पोल
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बिहार सरकार भले ही भूमि विवाद और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लगातार सख्त फैसले ले रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। विभागीय आदेशों और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जगहों पर अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। ताज़ा मामला भू-लगान वसूली से जुड़ा है, जहां ऑफलाइन भू-लगान रसीद पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद कई जिलों में खुलेआम इसका उल्लंघन किया गया। हैरानी की बात यह है कि यह गंभीर गड़बड़ी किसी बाहरी शिकायत से नहीं, बल्कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अपनी जांच में सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 

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विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों ने बिहार के राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार सहरसा, सुपौल, वैशाली, सीतामढ़ी और मोतिहारी जिलों में 30 अगस्त 2024 के बाद भी ऑफलाइन भू-लगान रसीदें काटी गईं, जबकि इस पर पहले ही पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा चुका था। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया है कि इस मामले में संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों की आपराधिक षड्यंत्र की मंशा से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। डीएम से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके जिले में मौजूद अनुपयोग में लाई गई ऑफलाइन रसीदों का वॉल्यूम इस समय किसके कब्जे में है और इन्हें कहां सुरक्षित रखा गया है। साथ ही, यह भी पूछा गया है कि किन परिस्थितियों में प्रतिबंध के बावजूद इन रसीदों का उपयोग किया गया।

राजस्व विभाग ने कुछ जिलों को सकारात्मक उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया है। भागलपुर, शेखपुरा, पूर्णिया और दरभंगा जैसे जिलों ने समय पर ऑफलाइन रसीदों का वॉल्यूम अभिलेखागार में जमा करा दिया था। हालांकि, सुपौल को लेकर स्थिति चौंकाने वाली है, जहां रिकॉर्ड के अनुसार रसीदों का वॉल्यूम अभिलेखागार में जमा था, फिर भी ऑफलाइन रसीद काटे जाने का मामला सामने आया।

विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी डीएम, एडीएम, डीसीएलआर और सीओ को भेजे पत्र में इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि प्राप्त, व्यवहृत, अव्यवहृत और शेष ऑफलाइन भू-लगान रसीदों का विस्तृत प्रतिवेदन तत्काल विभाग को भेजा जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने ऑफलाइन रसीद जारी की है, उन्हें चिह्नित कर उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि 24 अप्रैल 2024 को ही विभाग ने ऑफलाइन भू-लगान रसीद पर पूर्ण रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि सभी रसीदें जिला मुख्यालय में सुरक्षित रखी जाएं और 14 अगस्त 2024 तक पूरा ब्योरा विभाग को सौंपा जाए। इसके बाद केवल ऑनलाइन भुगतान और ऑनलाइन रसीद की व्यवस्था लागू की गई थी, जिसका उल्लंघन अब गंभीर प्रशासनिक संकट बनकर सामने आया है।