राहुल ने तेजस्वी से राहें जुदा कर लीं! कांग्रेस विधायक का बड़ा दावा

राहुल ने तेजस्वी से राहें जुदा कर लीं!  कांग्रेस विधायक का बड़ा दावा
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बिहार की राजनीति में कांग्रेस बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है। हालिया चुनावी झटकों और आरजेडी के साथ गठबंधन को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच पार्टी अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से हुई मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बिहार में पार्टी की कमजोर होती पकड़ को मजबूत करने के लिए कांग्रेस अब बड़े और सख्त फैसलों की ओर बढ़ रही है।

बिहार चुनाव बहिष्कार के मुद्दे ने फिर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को अलग  अलग राह पर ला खड़ा किया - rahul gandhi tejashwi yadav congress rjd alliance  bihar election 2025 opnm1 ...

बिहार में कांग्रेस संगठन को लेकर बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी ने जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करते हुए 29 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इन पर्यवेक्षकों को जिलों में जाकर संगठन की स्थिति का आकलन करने, जमीनी फीडबैक लेने और योग्य नेतृत्व की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस की व्यापक ओवरहॉलिंग योजना का हिस्सा है।

इसी राजनीतिक हलचल के बीच आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया है। इसे आरजेडी में नेतृत्व को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तों को लेकर चर्चाएं और अटकलें भी साथ-साथ तेज हो गई हैं।

वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने आरजेडी से गठबंधन को लेकर अपनी असहमति और चिंताएं रखी हैं। उनके मुताबिक, विधायकों का मानना है कि कांग्रेस को भविष्य में बेहतर चुनावी परिणाम हासिल करने के लिए संगठन को मजबूत करते हुए स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहिए। सुरेंद्र प्रसाद ने दावा किया कि पार्टी अगले चुनाव में अकेले उतरने की कोशिश करेगी और इस दिशा में राहुल गांधी ने भी अपनी सहमति दे दी है।

अभिषेक रंजन ने कहा कि आरजेडी अभी भी कांग्रेस की सम्मानित सहयोगी पार्टी है और गठबंधन को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी माना कि कुछ नेताओं की व्यक्तिगत राय अलग हो सकती है, लेकिन इसे पार्टी का आधिकारिक स्टैंड नहीं माना जाना चाहिए।

इन बयानों के बीच यह साफ है कि बिहार कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक दिशा को लेकर मंथन के दौर से गुजर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर क्या अंतिम फैसला लेता है।