एक्शन मोड में नई सरकार, बिहार विधानसभा का बजट सत्र जल्द!

एक्शन मोड में नई सरकार,  बिहार विधानसभा का बजट सत्र जल्द!
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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब राज्य में नई सरकार पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय-व्यय का खाका तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा के आगामी बजट सत्र को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

Bihar News :विधान सभा चुनाव से पहले इस दिन से शुरू हो रहा विधान मंडल का बजट  सत्र, जानिए क्यों है ख़ास - Bihar News : Bihar Budget Session Of The  Legislative

सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा का बजट सत्र फरवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, अभी तक विधानसभा सचिवालय की ओर से सत्र की आधिकारिक तिथियों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पूर्ण बजट पेश करेगी, वहीं इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा अनुपूरक बजट भी सदन के पटल पर रखा जाएगा।

तीसरे अनुपूरक बजट को लेकर सरकार विशेष रूप से सतर्क नजर आ रही है। इसके लिए राज्य के सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस अनुपूरक बजट में उन योजनाओं की गहन समीक्षा की जाएगी जिनमें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है या जहां खर्च की गति धीमी है। ऐसी योजनाओं के शेष बजट या उसके एक हिस्से को उन योजनाओं में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिनमें अतिरिक्त धनराशि की तत्काल आवश्यकता है।

वित्त विभाग की ओर से सभी विभागों को भेजे गए पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए राज्यांश यानी मैचिंग ग्रांट की व्यवस्था तीसरे अनुपूरक बजट के माध्यम से की जाएगी। यदि किसी केंद्रीय योजना के तहत भारत सरकार की ओर से राशि पहले ही जारी कर दी गई है, लेकिन राज्य बजट में उसके व्यय का प्रावधान नहीं हो पाया है, तो ऐसे मामलों में भी अनुपूरक बजट के जरिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे 19 जनवरी तक अपने-अपने प्रस्ताव वित्त विभाग को सौंप दें। साथ ही विभागों को यह भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी तभी मिलेगी जब उससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक न बढ़े। सरकार इस बात को लेकर खास तौर पर सतर्क है कि वित्तीय अनुशासन बना रहे और केंद्र सरकार के तय मानकों का उल्लंघन न हो।