बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग : मंत्री अशोक चौधरी

श्री चौधरी ने कहा कि 01 सितंबर 2026 को खाद्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के खरीद लक्ष्य निर्धारण को लेकर चर्चा हुई थी। वर्तमान व्यवस्था में पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। बिहार के संदर्भ में यह पद्धति राज्य में लगातार बढ़ रहे धान उत्पादन और किसानों की वास्तविक क्षमता के अनुरूप पर्याप्त खरीद लक्ष्य निर्धारित करने में बाधक है।

बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 35 लाख से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग : मंत्री अशोक चौधरी
Image Slider
Image Slider
Image Slider

पटना: बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री अशोक चौधरी ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए बिहार में निर्धारित धान खरीद के लक्ष्य को 35 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी को पत्र भेजकर आवश्यक स्वीकृति शीघ्र प्रदान करने का अनुरोध किया है।

मंत्री श्री अशोक चौधरी ने कहा कि भारत सरकार ने पत्र के माध्यम से बिहार के लिए खरीफ विपणन मौसम 2026-27 हेतु धान खरीद का लक्ष्य 35.00 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। धान खरीद की अवधि 01 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। पिछले वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में धान का अनुमानित उत्पादन लगातार बढ़ा है, जबकि कुल अनुमानित उत्पादन के अनुपात में धान खरीद का लक्ष्य लगातार कम होता गया है। वर्ष 2023-24 में अनुमानित धान उत्पादन 133.26 लाख मीट्रिक टन था और खरीद लक्ष्य 45 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था। वर्ष 2024-25 में अनुमानित उत्पादन बढ़कर 141.08 लाख मीट्रिक टन हुआ, जबकि खरीद लक्ष्य 45 लाख मीट्रिक टन रहा। वर्ष 2025-26 में अनुमानित उत्पादन 151.36 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया, लेकिन खरीद लक्ष्य घटकर 36.85 लाख मीट्रिक टन रह गया। वहीं, वर्ष 2026-27 में अनुमानित धान उत्पादन 154.39 लाख मीट्रिक टन है, जबकि खरीद लक्ष्य मात्र 35 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है।

मंत्री ने कहा कि राज्य में धान खरीद की क्षमता में लगातार उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2023-24 में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 68.42 प्रतिशत, वर्ष 2024-25 में 87.18 प्रतिशत तथा वर्ष 2025-26 में 99.84 प्रतिशत धान की खरीद की गई। इससे स्पष्ट है कि बिहार निर्धारित खरीद लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम है।

श्री चौधरी ने कहा कि 01 सितंबर 2026 को खाद्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के खरीद लक्ष्य निर्धारण को लेकर चर्चा हुई थी। वर्तमान व्यवस्था में पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। बिहार के संदर्भ में यह पद्धति राज्य में लगातार बढ़ रहे धान उत्पादन और किसानों की वास्तविक क्षमता के अनुरूप पर्याप्त खरीद लक्ष्य निर्धारित करने में बाधक है।

उन्होंने आग्रह किया कि बिहार के लिए धान खरीद का लक्ष्य पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद उपलब्धि के आधार पर निर्धारित करने के बजाय राज्य के अनुमानित धान उत्पादन को आधार बनाकर निर्धारित किया जाए। इससे अधिक से अधिक किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि बिहार में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत जन वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरण के लिए प्रतिवर्ष लगभग 33.16 लाख मीट्रिक टन चावल की आवश्यकता होती है, जो लगभग 48.87 लाख मीट्रिक टन धान के बराबर है। बिहार अब स्थानीय स्तर पर आवश्यक मात्रा में धान की खरीद करने में सक्षम है। राज्य की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किए जाने से बिहार खाद्यान्न के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा तथा अन्य राज्यों से चावल मंगाने में होने वाली अतिरिक्त परिवहन लागत को भी कम किया जा सकेगा।

श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान 35 लाख मीट्रिक टन का धान खरीद लक्ष्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा अन्य सरकारी योजनाओं के तहत राज्य की चावल आवश्यकता को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। लक्ष्य कम रहने की स्थिति में राज्य के बड़ी संख्या में किसान भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने के अवसर से वंचित हो सकते हैं।

उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए बिहार का धान खरीद लक्ष्य 50 लाख मीट्रिक टन निर्धारित करने की आवश्यक स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाए, ताकि राज्य के अधिक से अधिक किसानों को उनकी धान की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो सके और बिहार की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।