सोशल मीडिया से सत्ता के गलियारों तक: इन फाइलों ने क्यों मचाई वैश्विक हलचल?
इस वक्त पूरी दुनिया में कुछ फाइलें और दस्तावेज़ तेज़ी से ट्रेंड कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, हर जगह इन्हीं मुद्दों की चर्चा है। चाहे बात हो Epstein Files की, भारत से जुड़े Adani Group को लेकर उठ रहे सवालों की, या फिर अमेरिका–भारत ट्रेड डील से जुड़ी संभावनाओं की—इन सभी ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है।

सबसे पहले बात करते हैं Epstein Files की। जेफ्री एपस्टीन—एक अमेरिकी फाइनेंसर, जिस पर 2019 में नाबालिगों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर आरोप लगे थे। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही एपस्टीन न्यूयॉर्क की जेल में मृत पाया गया। सरकारी एजेंसियों के मुताबिक यह आत्महत्या थी, लेकिन इस मौत को लेकर आज भी कई सवाल उठते रहे हैं।
अब अमेरिकी अदालत के आदेश पर एपस्टीन से जुड़े हजारों पन्नों के दस्तावेज़ धीरे-धीरे सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिन्हें Epstein Files कहा जा रहा है। इनमें पीड़ितों के बयान, ईमेल रिकॉर्ड, उड़ानों के लॉग और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज़ शामिल हैं। इन फाइलों में कई नाम सामने आए हैं, जिनमें कारोबारी, राजनेता और प्रभावशाली हस्तियां भी शामिल हैं। हालांकि यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि किसी दस्तावेज़ में नाम आना, अपराध साबित होने के बराबर नहीं होता—जब तक कि अदालत दोष सिद्ध न कर दे।
अब इस पूरे मामले में भारत से जुड़ा संदर्भ भी सामने आया है। कुछ रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 की इज़रायल यात्रा का हवाला दिए जाने की बात कही गई। इस पर भारत सरकार ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा पूरी तरह सार्वजनिक और सरकारी थी, और Epstein Files से जोड़कर किए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार और कल्पनात्मक हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इन खबरों का किसी वास्तविक तथ्य से कोई संबंध नहीं है और भारत सरकार इन्हें सिरे से खारिज करती है।
अब बात करते हैं Adani Group से जुड़ी चर्चाओं की। आपको याद होगा कि 2023 में Hindenburg रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें अडानी समूह पर कई आरोप लगाए गए थे। अडानी ग्रुप ने उस वक्त भी और बाद में भी इन आरोपों को पूरी तरह नकारा। फिलहाल सोशल मीडिया पर कुछ कथित नए दस्तावेज़ वायरल होने की चर्चा है, लेकिन अब तक किसी भी नियामक संस्था या जांच एजेंसी ने इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
तीसरा अहम मुद्दा है—अमेरिका और भारत के बीच संभावित ट्रेड डील। दोनों देश एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लीन एनर्जी जैसे अहम सेक्टर शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है, लेकिन फिलहाल इसे लेकर कोई अंतिम समझौता या आधिकारिक दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया गया है।
Divya Singh