बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की उपलब्धियाँ: विकास की मजबूत नींव,ग्रामीण संपर्कता और विकास में नई पहल
बिहार में ग्रामीण सड़क और पुल निर्माण से 1,20,876 बसावटों को संपर्कता मिली। ये परियोजनाएँ ग्रामीण जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।
BIHAR:बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्कता और विकास को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।ग्रामीण बसावटों और टोलों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ना, पहले से निर्मित ग्रामीण पथों और पुलों का सुदृढ़ीकरण, तथा उनका नियमित अनुरक्षण राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत राज्य और केंद्र प्रायोजित विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल संपर्कता प्रदान करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक कल्याण में भी सुधार करना है। सड़क और पुल निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है, किसानों और व्यापारियों को बाजार तक आसानी से पहुँचने में मदद मिलती है, तथा बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा के अवसर आसान बनते हैं।

प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां
बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री सात निश्चय पार्ट–3 योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कुल 1,29,990 बसावटों को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 1,33,675 किलोमीटर पथ और 4,655 पुलों का निर्माण किया जाना है।
अब तक, 1,20,876 बसावटों को 1,19,915 किलोमीटर सड़क और 2,750 पुलों के माध्यम से संपर्कता प्रदान की जा चुकी है। विभाग बचे हुए कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के लक्ष्य से लगातार काम कर रहा है।

प्रमुख योजनाओं की उपलब्धियाँ
1. मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना
250 या अधिक आबादी वाले ग्रामीण बसावटों/टोलों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान की जाती है।
अब तक 35,532 किलोमीटर पथ और 328 पुलों की स्वीकृति दी गई, जिनमें 32,423 किलोमीटर पथ और 189 पुल का निर्माण पूर्ण हुआ है।
2. मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष)
100 या अधिक आबादी वाले छूटे हुए बसावटों के ऐप आधारित सर्वेक्षण में 13,815 बसावटें (16,652 किलोमीटर) असंपर्कित पाई गईं।
अब तक 6,083 बसावटों को जोड़ने के लिए 8,095 किलोमीटर पथों की स्वीकृति दी गई, जिसमें 1,885 पथ (1,983 किलोमीटर) और 1 पुल का निर्माण पूर्ण हुआ है।
3. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
PMGSY–I:
स्वीकृति: 39,462.47 किलोमीटर सड़कों और 1,206 पुल।
निर्माण पूर्ण: 38,057.21 किलोमीटर सड़क और 1,163 पुल।
PMGSY–II:
स्वीकृति: 2,456.47 किलोमीटर पथ और 102 पुल।
निर्माण पूर्ण: 2,442.33 किलोमीटर पथ और 98 पुल।
PMGSY–III:
स्वीकृति: 6,162.17 किलोमीटर पथ और 709 पुल।
निर्माण पूर्ण: 5,383.70 किलोमीटर पथ और 384 पुल।
4. ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना
100–249 आबादी वाले 4,643 ग्रामीण टोलों को जोड़ने के लिए 3,977.30 किलोमीटर पथ का निर्माण लगभग पूर्ण।
5. राज्य योजना
स्वीकृति: 5,250.617 किलोमीटर पथ और 1,220 पुल।
निर्माण पूर्ण: 5,150 किलोमीटर पथ और 1,010 पुल।
6. मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ नवीनीकरण एवं अनुरक्षण कार्यक्रम
(बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति–2018)
कृति: 40,240.79 किलोमीटर पथ।
निर्माण पूर्ण: 36,941.96 किलोमीटर पथ।
नीति Output एवं Performance आधारित है, Bump Indicator Machine और IRI मानकों पर निरीक्षण किया जाता है।
7. मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना
स्वीकृति: 856 पथ (3,034 किलोमीटर)।
निर्माण पूर्ण: 2,793 किलोमीटर पथ।
8. ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम
नवंबर 2024 में प्रारंभ।
स्वीकृति: 14,087 पथ (24,481 किलोमीटर) और 4,079 पथ (6,484 किलोमीटर) पुनर्निर्माण एवं प्रबंधन।
अधिकांश पथों पर कार्य प्रगति पर।
9. मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना
सितंबर 2024 में प्रारंभ स्वीकृति: 909 पुल (₹4,744.64 करोड़)।
670 पुलों पर कार्य प्रगति पर।
10. सुलभ संपर्कता योजना
वित्तीय वर्ष 2025–26 में 72 योजनाओं का चयन, 65 को प्रशासनिक स्वीकृति।
13 योजनाओं पर निर्माण कार्य जारी।
11. सात निश्चय पार्ट–3
ग्रामीण सड़कों का चरणबद्ध चौड़ीकरण कर Intermediate Lane (5.5 मीटर) निर्माण।
ऐप आधारित Transit Walk Survey जनवरी माह तक पूरा करने का लक्ष्य।
बिहार सरकार की ये पहलें ग्रामीण क्षेत्रों की संपर्कता, सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। सड़कों और पुलों का निर्माण न केवल ग्रामीण जीवन को सरल और सुगम बना रहा है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा कर रहा है।
राज्य में ग्रामीण सड़क और पुल परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार का ग्रामीण विकास अब ठोस आधार पर खड़ा है, और भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार की संभावनाएं हैं।
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