पटना का जेपी गंगा सेतु बना गंदगी का अड्डा, आम आदमी से पुलिस तक सवालों के घेरे में, कारण जानकर चौंक जाएंगे आप !
सेतु पर गुजरने वाले कार चालक हों या मोटरसाइकिल सवार, बेखौफ होकर वाहन की खिड़की से पान और गुटखा थूक रहे हैं। नतीजा यह है कि कभी ब्लैक एंड व्हाइट दिखने वाला डिवाइडर अब पूरी तरह लाल रंग में तब्दील हो चुका है। यही नहीं, सेतु के किनारे और खाली स्पेस में लोग खुलेआम पेशाब करते नजर आते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंदगी में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल दिख रहे हैं।
PATNACITY : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले करीब 20 किलोमीटर लंबा जेपी गंगा सेतु पथ आज गंदगी और अव्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है। दीघा से लेकर दीदारगंज तक बने इस अत्याधुनिक सेतु को राजधानी की पहचान बताया गया था, लेकिन अब यही सेतु पान, गुटखा और पेशाब की बदबू से कराहता नजर आ रहा है।
सेतु पर गुजरने वाले कार चालक हों या मोटरसाइकिल सवार, बेखौफ होकर वाहन की खिड़की से पान और गुटखा थूक रहे हैं। नतीजा यह है कि कभी ब्लैक एंड व्हाइट दिखने वाला डिवाइडर अब पूरी तरह लाल रंग में तब्दील हो चुका है। यही नहीं, सेतु के किनारे और खाली स्पेस में लोग खुलेआम पेशाब करते नजर आते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंदगी में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल दिख रहे हैं।
एक तरफ पटना नगर निगम ने सड़क पर थूकने वालों पर ₹500 जुर्माना लगाने और उनकी तस्वीर सार्वजनिक करने का फरमान जारी किया है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सेतु पर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती तो है, लेकिन स्वच्छता को लेकर न कोई निगरानी है और न ही कोई ठोस व्यवस्था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 20 किलोमीटर लंबे इस सेतु पर आज तक एक भी सार्वजनिक टॉयलेट या बाथरूम की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ठंड के मौसम में खासकर दोपहिया वाहन चालकों को मजबूरी में सेतु पर ही पेशाब कर दे रहे है। न शेड की व्यवस्था है, न रुकने की कोई जगह। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या गंदगी फैलाने की जिम्मेदारी सिर्फ आम जनता की है, या फिर प्रशासन भी उतना ही जिम्मेदार है? राजधानी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जेपी गंगा सेतु पर साफ नजर आ रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक आंखें मूंदे रखता है।
पटनासिटी से अनिल कुमार की रिपोर्ट
rsinghdp75