गणतंत्र दिवस 2026: बिहार की झांकी में मखाना की लोकल से ग्लोबल सुपरफूड यात्रा
77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर बिहार की झांकी इस बार विशेष आकर्षण होगी। झांकी की थीम “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड” है, जिसमें मखाने की खेती, प्रसंस्करण और वैश्विक बाजार तक की यात्रा दिखायी जाएगी। मिट्टी के चूल्हे पर मखाना भूनती महिलाएं, मूसल से फोड़ते पुरुष और मिथिला पेंटिंग के बॉर्डर के जरिए बिहार की संस्कृति और ग्रामीण कौशल को उजागर किया जाएगा। झांकी का संदेश है कि स्थानीय उत्पाद भी ग्लोबल पहचान बना सकते हैं, और यह बिहार की कृषि, संस्कृति और नवाचार को देश-विदेश में प्रदर्शित करेगी।
पटना: 77वें गणतंत्र दिवस के भारत पर्व समारोह में बिहार की झांकी इस बार विशेष आकर्षण के रूप में शामिल होगी। झांकी की थीम “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड” रखी गई है। इसमें बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पाद मखाने की यात्रा मिथिला के तालाबों से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक दर्शाई जाएगी।

मखाना,जिसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है, बिहार की पारंपरिक कृषि का अहम उत्पाद है। आज यह पोषण से भरपूर सुपरफूड बन चुका है और ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। झांकी के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बिहार का यह पारंपरिक उत्पाद कैसे आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बन गया है।

झांकी में मखाने की पूरी यात्रा दिखायी जाएगी। इसमें मखाने की खेती, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की प्रक्रिया शामिल है। मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिलाएं और लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ते पुरुष ग्रामीण कौशल और पारंपरिक श्रम की जीवंत झलक पेश करेंगे। झांकी में स्थानीय श्रम और महिला सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया है, जो बिहार की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करेगा।झांकी को दो हिस्सों में तैयार किया गया है। ट्रैक्टर खंड में कमल के पत्तों के बीच उभरता सफेद मखाना दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके आगे जीआई टैग का प्रतीक और झांकी के किनारों पर मिथिला पेंटिंग की आकर्षक बॉर्डर बिहार की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाएगी।

झांकी का संदेश स्पष्ट है – लोकल उत्पाद भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं। मखाना, जो बिहार की पारंपरिक कृषि और ग्रामीण समुदाय का प्रतीक है, आज पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी मजबूत जगह बना चुका है।इस झांकी के माध्यम से देश और दुनिया को यह भी दिखाया जाएगा कि बिहार की पारंपरिक कृषि, स्थानीय कौशल और संस्कृति को कैसे आधुनिक दृष्टिकोण और ग्लोबल स्तर पर पहचान मिली है। गणतंत्र दिवस पर बिहार की यह झांकी निश्चित रूप से दर्शकों का ध्यान खींचेगी और राज्य की कृषि, संस्कृति और नवाचार को एक साथ प्रदर्शित करेगी।
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