मुख्यमंत्री ने सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के बिहार डायरी एवं कैलेण्डर-2026 का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 01 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प‘ में बिहार सरकार के सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित बिहार डायरी एवं कैलेण्डर-2026 का लोकार्पण कर राज्य की जनता को समर्पित किया।
PATNA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 01 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प‘ में बिहार सरकार के सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित बिहार डायरी एवं कैलेण्डर-2026 का लोकार्पण कर राज्य की जनता को समर्पित किया।
बिहार आज आत्मविश्वास और संकल्प के साथ उस विकास यात्रा पर है जहां प्रगति योजनाओं से आगे बढ़कर जनजीवन का हिस्सा बन गई है। कैलेंडर-2026 में इस परिवर्तन एवं विकसित बिहार के सपने को साकार करने के लक्ष्यों के साथ राज्य में किए जा रहे जनकल्याणकारी कार्यों को समावेशित किया गया है। सात निश्चय 3.0 ‘‘विकसित बिहार’’ का आधार है, जो हर नागरिक के जीवन में अवसर, सुविधा और सम्मान जोड़ता है। ‘प्रतिव्यक्ति दुगुना रोजगार, दुगुनी आय’, समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार, ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश की समृद्धि’, ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’, ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’, ‘मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार’ और ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ जैसे निश्चय आत्मनिर्भरता की दिशा तय करते हैं। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में निवेश, उद्योग और कृषि तथा सहकारिता ने विकास का नया त्रिकोण बनाया है।
शिक्षा और कौशल विकास योजनाओं ने युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के योग्य बनाया है, वहीं एक करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य बिहार को आत्मनिर्भर बना रहा है। आई0टी0 नीति 2024, स्टार्टअप बिहार और डिजिटल स्किल सेंटरों ने नवाचार को नई गति दी है। संस्कृति, पर्यटन और ग्रामीण ढांचे में तेजी से सुधार हुआ है। जे0पी0 गंगा पथ, मेट्रो और एयरपोर्ट परियोजनाएं संपर्क और निवेश के प्रतीक बने हैं। जीविका से जुड़ी 1.40 करोड़ महिलाएं सशक्तिकरण की मिसाल हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं, खेल और मखाना उद्योग ने बिहार को नई पहचान दी है। सुशासन, नीति-स्थिरता और जन-भागीदारी मिलकर “विकसित बिहार” के उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पना को साकार कर रही हैं।
बिहार कैलेण्डर 2026 के जनवरी माह के पृष्ठ पर सात निश्चय 3.0- प्रगति, विश्वास एवं जनकल्याण का निश्चय के तहत रोजगार और आय को बढ़ावा देने हेतु पहला निश्चय ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’, बिहार में औद्योगिक क्रांति हेतु दूसरा निश्चय ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’, किसानों की आय बढ़ाने के लिए तीसरे निश्चय ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश की समृद्धि’, शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक एवं बेहतर बनाने हेतु चौथा निश्चय ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पांचवा निश्चय ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’, आम जनमानस के लिए नए शहर और सस्ते आवास की व्यवस्था हेतु छठा निश्चय ‘मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार’ एवं बेहतर जीवन व्यवस्था के लिए सातवां तथा अंतिम निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ जैसे संकल्पों के साथ समावेशी, संतुलित और सतत विकास का ठोस रोडमैप तैयार किया गया है। ये निश्चय हर वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाएँगे और बिहार को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे ताकि बिहार देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सके।
फरवरी माह के पृष्ठ पर औद्योगिक विकास नई गाथा लिख रहा बिहार के माध्यम से बिहार में उद्योग और व्यापार में हाल के वर्षों में तेज विकास हुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया, जिसमें पहली बार मुफ्त जमीन और वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं। महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये महिला रोजगार जैसी विशेष योजनाएं चलाई गईं। बक्सर, बिहटा और पश्चिम चंपारण में नए औद्योगिक केंद्र विकसित हुए हैं। नवानगर (बक्सर) और बिहटा में आधुनिक उद्योगों से रोजगार बढ़ा है। नरकटियागंज चीनी मिल के पुनरुद्धार और सुधा ब्रांड के विस्तार से कृषि व दुग्ध क्षेत्र को मजबूती मिली है। उद्योग, कृषि और सहकारिता के समन्वय से बिहार आर्थिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है।
मार्च माह के पृष्ठ पर शिक्षा और कौशल के जरिये शिक्षा से सशक्त, स्किल से समृद्ध युवा बिहार बनाने की दिशा में शिक्षा और कौशल विकास को बिहार ने भविष्य निर्माण की आधारशिला बनाया है। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति योजनाएं और साइकिल योजना ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ा है। उच्च शिक्षा संस्थानों में आधुनिक पाठ्यक्रम और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना अंतर्गत 4 लाख रूपये तक ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा दी गयी है। ‘कौशल विकास मिशन’ के अंतर्गत युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आई0टी0आई0, पॉलिटेक्निक और डिजिटल स्किल सेंटर ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। शिक्षा और कौशल का यह समन्वय बिहार के युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के लिए तैयार कर रहा है।
अप्रैल माह के पृष्ठ पर रोजगार मतलब नीतीश सरकार के माध्यम से बिहार में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य प्रशासनिक सेवाओं में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां कर युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराया है। कौशल विकास और रोजगार प्रोत्साहन के लिए प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण, कौशल विकास योजना, उद्यमी योजना, श्रम शक्ति योजना तथा खेल और रोजगार दोनों को बढ़ावा देने के लिये मेडल लाओ, नौकरी पाओ जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार ने आगामी 5 वर्षों में 1 करोड़ नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। पारदर्शी भर्ती और कौशल आधारित अवसरों से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे आत्मनिर्भर बिहार की नींव मजबूत हो रही है।
मई माह के पृष्ठ पर विज्ञान और प्रावैधिकी के तहत नवाचार और भविष्य निर्माण पर जोर दिया गया है। विज्ञान और प्रावैधिकी के क्षेत्र में बिहार में तकनीकी शिक्षा, नवाचार और डिजिटल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आई0टी0 पार्क, स्टार्टअप हब और रिसर्च सेंटर ने युवाओं को नये अवसर दिए हैं। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में तकनीकी प्रयोगों ने सेवाओं को आधुनिक बनाया है। युवाओं के लिए रोजगार सृजन और आई0टी0 व ई0एस0डी0एम0 में निवेश आकर्षित करने हेतु राज्य सरकार ने 8 जनवरी, 2024 को ‘बिहार आईटी नीति 2024’ में मंजूरी दी। ‘स्टार्टअप बिहार’ योजना ने नवाचार को बढ़ावा दिया है। अब राज्य के सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थान हैं। डिजिटल लैब व रोबोटिक्स शिक्षा ने छात्रों को भविष्य की तकनीक से जोड़ा है, जिससे बिहार भविष्य निर्माण की दिशा में अग्रसर है।
जून माह के पृष्ठ पर सांस्कृतिक विरासत, बिहार की पहचान के तहत समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत वाला बिहार हिंदू, बौद्ध, जैन और सूफी परंपराओं की साझा धरोहर को सहेजते हुए संरक्षण और विकास दोनों को समान महत्व दे रहा है। वैशाली में 72 एकड़ भूमि पर बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप के निर्माण ने बौद्ध पर्यटन को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी है। मनेरशरीफ दरगाह जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सम्मान का भाव सुदृढ़ हुआ है। पटना का प्रकाश पुंज आधुनिक स्मारक के रूप में नई पहचान बना रहा है, वहीं पुनौरा धाम, सीतामढ़ी के प्रस्तावित विकास से धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलने जा रहा है। आस्था, इतिहास और आधुनिकता के समन्वय के साथ विभिन्न धर्म और संस्कृति के उपासक बिहार की पावन धरती देश-विदेश के पर्यटकों को आमंत्रित कर रहा है। परंपरा और आधुनिकता के संगम से उभरता बिहार भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है।
जुलाई माह के पृष्ठ पर ग्रामीण विकास, सशक्त पंचायत, प्रगतिशील बिहार के तहत बिहार के गांव विकास की नई पहचान बन रहे हैं। पक्की सड़कें, हर घर नल का जल, बिजली और कृषि योजनाओं ने ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाया है। इससे महिला सशक्तीकरण, युवाओं के रोजगार और किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे राज्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। पंचायती राज व्यवस्था ने स्थानीय नेतृत्व को सशक्त किया है। डिजिटल पंचायत और ग्राम सभाओं ने पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया है। पंचायत सरकार भवनों से प्रशासनिक कार्य, सरकारी योजनाएं और सेवाएं एक जगह उपलब्ध हो रही हैं। सशक्त पंचायतें बिहार को प्रगतिशील और आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में अग्रसर कर रही हैं।
अगस्त माह के पृष्ठ पर आधारभूत संरचनाओं का विस्तार, समृद्धि का नया आधार के तहत सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गत बिहार ने विकास की नई रफ्तार पकड़ी है। नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे और हाई-स्पीड कॉरिडोर ने राज्य की कनेक्टिविटी को मजबूत किया है, वहीं ओंटा-सिमरिया, कच्ची दरगाह-बिदुपुर गंगा पुल, जेपी गंगा पथ और डबल डेकर फ्लाईओवर पटना की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाते हुए नागरिकों को बेहतर आवागमन का अनुभव प्रदान कर रहे है। वर्ष 2027 तक पटना राज्य के किसी भी कोने से मात्र 3ः30 घंटे की दूरी पर होगा। ये परियोजनाएं केवल संरचनाएं नहीं बल्कि व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी हैं। बिहार अब विकास की संभावनाओं को साकार कर रहा है।
सितम्बर माह के पृष्ठ पर महिला सशक्तीकरण, आधी आबादी पूरा अधिकार के तहत बिहार में महिला सशक्तीकरण को विकास की आधारशिला बनाया गया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर मजबूत हुई है। आरक्षण से हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ‘जीविका’ से जुड़कर 1.40 करोड़ महिलाएं आत्मनिर्भर बन रहीं है, जबकि ‘महिला संवाद’ ने उनकी आवाज़ को नीति-निर्माण से जोड़ा है। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य व पोषण में अहम भूमिका निभाई है। साइकिल, पोशाक और कन्या उत्थान योजनाओं के कारण न केवल शिक्षा बल्कि कन्या भ्रूण हत्या, लिंगानुपात एवं दहेज प्रथा तथा बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों में अभूतपूर्व सुधार परिलक्षित हुआ है। इन पहलों से बिहार समावेशी और सतत विकास की ओर अग्रसर है।
अक्टूबर माह के पृष्ठ पर स्वस्थ बिहार का सपना साकार के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण ने बिहार को नई पहचान दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों तक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) को देश में सबसे बड़े अस्पताल के रूप में बनाया जा रहा है। पांच अन्य मेडिकल कॉलेजों (एनएमसीएच पटना, एएनएमसीएच गया, जेएलएनएमसीएच भागलपुर, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर और डीएमसीएच दरभंगा) को 2500 और आईजीआईएमएस को 3000 बेड की क्षमता वाला बनाया जा रहा है। फरवरी 2021 से शुरू हुई टेलीमेडिसिन व्यवस्था से गांवों में 2.5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं ने बिहारवासियों को निरोगी जीवन का भरोसा दिया है।
नवम्बर माह के पृष्ठ पर खेल विभाग अन्तर्गत युवाओं के हौसलों की उड़ान के तहत बीते वर्षों में बिहार ने खेलों के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए ‘मेडल लाओ-नौकरी पाओ’ और ‘मशाल 2024’ जैसी पहल शुरू की गई। आधुनिक खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों को अवसर देने की नीति के चलते राज्य अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों का मजबूत मंच बन रहा है। राजगीर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम ने बिहार को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। एशियन महिला हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की विजय, एशिया रग्बी चैंपियनशिप, हॉकी एशिया कप और खेलो इंडिया यूथ गेम्स ने खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रतिस्पर्द्धा का अनुभव और राज्य को वैश्विक मान्यता दी। बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संरचना और अवसरों ने खेलों को बिहार के युवाओं के लिए करियर और पहचान का सशक्त माध्यम बना दिया है।
कैलेण्डर के अंतिम पृष्ठ (दिसम्बर माह) पर सुपर फूड मखाना, बिहार को दिला रहा वैश्विक पहचान का जिक्र है। इसके तहत बिहार के मिथिलांचल और सिमांचल क्षेत्रों में विश्व का 85 प्रतिशत उगाया जाने वाला मखाना (फॉक्स नट या गोरगॉन नट) भारत का सबसे मूल्यवान सुपरफूड बनकर उभरा है। घरेलू तथा वैश्विक बाजार में इसकी मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। फिलहाल बिहार का मखाना अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इंग्लैंड, कनाडा, फ्रांस और खाड़ी देशों में निर्यात हो रहा है। बिहार में करीब 5 लाख परिवार मखाना अर्थव्यवस्था से जुड़े है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन से मखाना किसानों की समृद्धि एवं खुशहाली का नया रास्ता खुला है। इससे मखाना उत्पादक किसानों को वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग में बहुत मदद मिलेगी। बेहतर सिंचाई सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और सरकार की संवेदनशील पहल ने मखाना खेती को नई मजबूती दी है।
बिहार डायरी एवं कैलेण्डर के लोकार्पण के अवसर पर सूचना एवं जन-सम्पर्क मंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव सह सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह तथा सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के निदेशक श्री अनिल कुमार उपस्थित थे।
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