BIHAR TOURISIM:कैमूर की वादियों में लौटेगा बाघ, बिहार को मिलने जा रहा दूसरा टाइगर रिजर्व, NTCA से मिली सैद्धांतिक मंजूरी

BIHAR TOURISIM: बिहार के वन्यजीव संरक्षण को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाद अब राज्य को दूसरा टाइगर रिजर्व मिलने की राह साफ हो गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

BIHAR TOURISIM:कैमूर की वादियों में लौटेगा बाघ, बिहार को मिलने जा रहा दूसरा टाइगर रिजर्व, NTCA से मिली सैद्धांतिक मंजूरी
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Bihar Tourisim:बिहार में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। कैमूर वन्यजीव अभयारण्य जल्द ही बिहार का दूसरा टाइगर रिजर्व बन सकता है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि NTCA से सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है और अंतिम अधिसूचना के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है।

करीब 1,504 वर्ग किलोमीटर में फैला कैमूर वन्यजीव अभयारण्य कैमूर और रोहतास जिलों में विस्तृत है। यह न सिर्फ बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है, बल्कि विंध्याचल पर्वतमाला में स्थित होने के कारण जैव विविधता के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है। वर्ष 2018 में यहां बाघों की मौजूदगी के प्रमाण—जैसे पंजों के निशान और शिकार के अवशेष—मिलने के बाद इसे टाइगर रिजर्व बनाने की मांग तेज हो गई थी।

कैमूर क्षेत्र में बाघों के अलावा तेंदुआ, स्लॉथ बीयर, नीलगाय, चीतल, सांभर हिरण और जंगली सूअर जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं। करकट और तेलहार जैसे प्राकृतिक झरने इस क्षेत्र को ईको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ाते हैं।

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और अहम पहल के तहत वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के सहयोग से पश्चिम चंपारण के बगहा में रेप्टाइल इनक्यूबेशन-सह-इंटरप्रिटेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र गंडक नदी बेसिन में पाए जाने वाले सरीसृपों के संरक्षण और प्रजनन पर विशेष रूप से काम करेगा।

कुल मिलाकर, कैमूर को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलना बिहार में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और ईको-टूरिज्म के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।