आस्था, संस्कृति और कारोबार का उत्सव बागेश्वर उत्तरायणी मेला शुरू, पारंपरिक वेश-भूषा में सजे कलाकारों ने समां बांधा
कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर जनपद में प्रसिद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक, राजनीतिक और व्यापारिक महत्व रखने वाले उत्तरायणी मेले का भव्य शुभारंभ हो चुका है। मेले का उद्घाटन सूबे के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा विधिवत रूप से किया गया। उत्तरायणी मेले की समृद्ध विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने झांकियों के माध्यम से कुमाऊंनी संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुति दी।
UTTARAKHAND : कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर जनपद में प्रसिद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक, राजनीतिक और व्यापारिक महत्व रखने वाले उत्तरायणी मेले का भव्य शुभारंभ हो चुका है। मेले का उद्घाटन सूबे के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा विधिवत रूप से किया गया। उत्तरायणी मेले की समृद्ध विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने झांकियों के माध्यम से कुमाऊंनी संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुति दी।
पारंपरिक वेश-भूषा में सजे कलाकारों ने लोक नृत्य और लोक कला के जरिये दर्शकों का मन मोह लिया। बागेश्वर का ऐतिहासिक उत्तरायणी मेला लगातार सात दिनों तक दिन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
मेले को सफल बनाने के लिए बागेश्वर जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। उत्तरायणी मेले की सांस्कृतिक परंपराओं में लोक गाथाओं का गायन, झोड़ा–चांचरी, बैर जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल हैं, जिनके माध्यम से कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति का आदान-प्रदान होता है।
मेले के दौरान बागेश्वर में ऊन, रिंगाल, बर्तन, दाल सहित अनेक स्थानीय उत्पादों का व्यापार होता है, जो समय के साथ अब व्यावसायिक रूप से एक विस्तृत स्वरूप ले चुका है। कुल मिलाकर, बागेश्वर का उत्तरायणी मेला न सिर्फ आस्था और संस्कृति का संगम है, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करता है।
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