केंद्रीय बजट 2026-27 से उम्मीदें: बिहार ने मांगा बाढ़ राहत पैकेज और रिकॉर्ड 1 लाख करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण
केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले बिहार सरकार ने केंद्र से 1 लाख करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण और विशेष बाढ़ राहत पैकेज की मांग की है।
Patna: आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले बिहार सरकार ने केंद्र के सामने अपनी बड़ी और अहम मांगें रखी हैं। राज्य सरकार ने एक ओर जहां उत्तर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ से स्थायी राहत के लिए विशेष पैकेज की मांग की है, वहीं बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त दीर्घकालिक ऋण की भी जोरदार वकालत की है।
यह मांग बिहार के वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने 10 जनवरी 2026 को आयोजित बजट पूर्व परामर्श बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष रखी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बजट में बिहार की विशेष परिस्थितियों और विकास जरूरतों को गंभीरता से शामिल किया जाएगा, ताकि राज्य को राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाया जा सके।

पूंजीगत व्यय के लिए 1 लाख करोड़ के ब्याज मुक्त ऋण की मांग
वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार को बुनियादी ढांचे, सड़क, पुल, ऊर्जा और शहरी विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि बिहार को दी जाने वाली ब्याज मुक्त दीर्घकालिक ऋण सुविधा की सीमा बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये की जाए, जिससे उच्च प्रभाव वाली विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।
बाढ़ राहत और आपदा प्रबंधन के लिए विशेष समर्पित पैकेज
बिहार ने नेपाल से निकलने वाली कोसी, गंडक और बागमती नदियों से होने वाली भीषण बाढ़ को राज्य की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए केंद्र से समर्पित बाढ़ राहत एवं आपदा-रोधी पैकेज की मांग की। प्रस्ताव में उपग्रह आधारित पूर्वानुमान प्रणाली, वैज्ञानिक बाढ़ प्रबंधन और नदियों को जोड़ने (Interlinking of Rivers) जैसी योजनाओं को शामिल करने पर जोर दिया गया।
राजस्व हिस्सेदारी में संवैधानिक संतुलन की मांग
वित्त मंत्री ने केंद्र द्वारा लगाए जा रहे उप-कर (Cess) और अधिभार (Surcharge) के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन्हें विभाज्य कोष (Devolvable Pool) के अंतर्गत लाया जाना चाहिए, ताकि बिहार जैसे राज्यों को राष्ट्रीय कर संग्रह में उनका उचित और संवैधानिक हिस्सा मिल सके।
अतिरिक्त ऋण सीमा में 2% की छूट का प्रस्ताव
बिहार ने वर्ष 2024-25 में 13.09 प्रतिशत की मजबूत विकास दर हासिल की है, बावजूद इसके भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के कारण राज्य को अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। इसके लिए केंद्र से अनुरोध किया गया कि बिहार को GSDP के अतिरिक्त 2 प्रतिशत तक उधार लेने की अनुमति दी जाए, जब तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के बराबर नहीं हो जाती।
कृषि, तकनीक और मखाना उद्योग पर विशेष फोकस
राज्य सरकार ने पारंपरिक कृषि को आधुनिक कृषि-व्यवसाय मॉडल में बदलने के लिए AI, ड्रोन और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को अपनाने पर बल दिया। साथ ही बिहार की पहचान बन चुके मखाना उद्योग के लिए एक अलग मखाना बोर्ड के गठन और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विस्तार के लिए केंद्र से सहयोग मांगा गया।

औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का रोडमैप
वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार में प्रचुर जल संसाधन और कुशल श्रम शक्ति उपलब्ध है। यदि केंद्र सरकार उद्योगों की स्थापना में सहयोग करे, तो इससे न केवल राज्य का संतुलित विकास होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 से पहले बिहार ने बाढ़, वित्तीय संसाधन, कृषि, उद्योग और राजस्व हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर केंद्र के सामने मजबूत और तथ्यपरक पक्ष रखा है। अब देखना होगा कि आगामी केंद्रीय बजट में बिहार की इन मांगों को कितनी प्राथमिकता मिलती है।
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