गोरखपुर के एक कर्मी को मिला ₹28 करोड़ का CGST नोटिस ।
पहचान की चोरी (identity theft) का यह अजीब मामला गोरखपुर के टायर पंचर ठीक करने वाले राज प्रजापति से जुड़ा है।
राज प्रजापति को ₹100 करोड़ की एक कंपनी के लिए ₹28 करोड़ का CGST नोटिस मिला, जो उनके नाम पर चल रही थी। अपनी बहन की शादी के लिए लोन लेने के लिए उन्होंने जो डॉक्यूमेंट्स दिए थे, उनका कथित तौर पर गाँव के ही एक परिचित व्यक्ति ने गलत इस्तेमाल किया।
घटना की खास बातें इस प्रकार हैं:
पीड़ित: राज प्रजापति, जो यूपी के गोरखपुर में AIIMS पुलिस स्टेशन इलाके के रामपुर बुजुर्ग गाँव के रहने वाले हैं। वे पंचर ठीक करके अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।
धोखाधड़ी: प्रजापति ने अपनी बहन की शादी के लिए आर्थिक मदद पाने के मकसद से गाँव के ही अमित गुप्ता नाम के एक व्यक्ति को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर दिए थे। गुप्ता ने इन डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड किए गए वीडियो वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करके "M/s Gadgetrick Technology Pvt. Ltd." नाम की एक फर्जी कंपनी खोली।
टैक्स चोरी: धोखाधड़ी करने वालों ने फर्जी कंपनी के नाम पर खोले गए यस बैंक अकाउंट के ज़रिए लगभग ₹100 करोड़ का लेन-देन किया। इतना टर्नओवर करने के बाद, उन्होंने प्रजापति को बताए बिना कंपनी बंद कर दी।
समन: वाराणसी CGST विभाग ने इस बड़े पैमाने पर हुई टैक्स चोरी का पता लगाया। जब टैक्स अधिकारियों ने प्रजापति के पते पर छापा मारा, तो वे करोड़ों के कारोबार के बजाय पंचर ठीक करने की एक छोटी सी दुकान देखकर हैरान रह गए।
मौजूदा स्थिति: प्रजापति ने स्थानीय AIIMS पुलिस स्टेशन में औपचारिक रूप से FIR दर्ज कराई है, और धोखाधड़ी के इस बड़े नेटवर्क की पुलिस जाँच तेज़ी से चल रही है। NBC 24 के लिए पटना से अफ़ीफ़ा निज़ामी की रिपोर्ट।