उर्दू-संस्कृत के बिना नए कॉलेजों का क्या फायदा? - 'नीतीश सरकार पर बरसे AIMIM विधायक तौसीफ आलम

किशनगंज से AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू, संस्कृत और अरबी विषय शामिल न करने पर सरकार की तीखी आलोचना की है।

उर्दू-संस्कृत के बिना नए कॉलेजों का क्या फायदा? - 'नीतीश सरकार पर बरसे AIMIM विधायक तौसीफ आलम
विधायक तौसीफ आलम का सरकार पर बड़ा हमला, 211 नए कॉलेजों में उर्दू शामिल करने की मांग
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किशनगंज: बिहार में खोले गए 211 नए डिग्री कॉलेजों को लेकर सियासत गरमा गई है। किशनगंज के बहादुरगंज से AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने नए कॉलेजों में उर्दू, अरबी, फारसी और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण भाषा विषयों को शामिल नहीं किए जाने पर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इन जरूरी विषयों की पढ़ाई ही नहीं होगी, तो ऐसे नए कॉलेज खोलने का औचित्य ही समझ से परे है।

उद्घाटन कार्यक्रम का किया बहिष्कार:

विधायक तौसीफ आलम ने बताया कि उन्होंने इन कॉलेजों के उद्घाटन कार्यक्रम का पूरी तरह से बहिष्कार किया है। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि इन कॉलेजों की स्वीकृति और इससे जुड़ी पूरी कागजी प्रक्रिया पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में ही पूरी कर ली गई थी। वर्तमान सरकार को सिर्फ उद्घाटन करने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने मांग की है कि इन नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय और भाषा विषयों को तत्काल प्रभाव से जोड़ा जाए।

'68% मुस्लिम आबादी वाले किशनगंज के छात्रों के साथ अन्याय'

किशनगंज की डेमोग्राफी का हवाला देते हुए एआईएमआईएम विधायक ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा:"किशनगंज जिले की करीब 68 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय की है। यहाँ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उर्दू विषय को मुख्य भाषा के रूप में चुनते हैं और आगे की पढ़ाई करते हैं। ऐसे में अगर नए कॉलेजों में उर्दू की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होगी, तो सीमांचल के हजारों गरीब और होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाएगा।"

तौसीफ आलम ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाना है। सभी वर्गों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के समान अवसर देने के लिए सरकार को अपने इस त्रुटिपूर्ण फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक उर्दू, संस्कृत और अन्य भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाता, तब तक वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।