यूरोप बना भट्टी! रिकॉर्डतोड़ गर्मी से पिघल रही सड़कें, अब तक 1300+ मौतें, WHO ने दी बड़ी चेतावनी!
यूरोप इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की चपेट में! 1,300+ मौतें, स्कूल बंद और चरमराया सिस्टम। क्या मानव-जनित जलवायु परिवर्तन है इसकी असली वजह? पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ।
यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भीषण और समय से पहले आई हीटवेव (लू) की चपेट में है। भीषण गर्मी के कारण पूरे महाद्वीप में हाहाकार मचा हुआ है, जिससे बुनियादी ढांचा चरमरा गया है और सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस के अनुसार, 21 जून से अब तक यूरोप में भीषण तापमान के कारण 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
WHO प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी देते हुए हीट स्ट्रेस को "साइलेंट किलर" बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी गति से तप रहा है। यूरोप के घर, स्कूल और दफ्तर इस अत्यधिक तापमान को झेलने के लिए नहीं बने हैं।
रिकॉर्ड तोड़ रहा है तापमान, चरमराया सिस्टम
रविवार को महाद्वीप के कई देशों में गर्मी के पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए:
जर्मनी: पूर्वी हिस्से में पारा 41.7°C तक पहुंच गया, जो जर्मनी के इतिहास का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया।
चेक गणराज्य: प्राग के उत्तर में स्थित डोक्सानी में तापमान 41.1°C दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया गया।
पोलैंड: स्लुबिस शहर में तापमान 40.5°C तक जा पहुंचा।
अत्यधिक गर्मी के कारण पावर ग्रिड ठप हो रहे हैं, ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं और स्कूलों को बंद करना पड़ा है।
फ्रांस और स्पेन में भारी तबाही :
इस हीटवेव का सबसे बुरा असर फ्रांस में देखा गया है, जहां स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुधवार से अब तक करीब 1,000 अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं। मरने वालों में 85% से अधिक लोग 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग हैं। इसके अलावा, फ्रांस में डूबने से कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है क्योंकि लोग गर्मी से बचने के लिए जलाशयों का रुख कर रहे थे। वहीं स्पेन और जर्मनी से भी हीटस्ट्रोक के कारण मौतों की खबरें आई हैं।
क्या है इस भयंकर गर्मी की वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप के ऊपर बने 'हीट डोम' (Heat Dome) और हवा के चक्र 'ओमेगा ब्लॉक' (Omega Block) के कारण गर्म हवा एक ही जगह पर ठहर गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण जो हीटवेव पहले 300 साल में एक बार आती थी, वह अब हर दशक में बार-बार आ रही है और वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से लगातार ऊपर बना हुआ है।पटना से NBC 24 के लिए अंकित कुमार की रिपोर्ट।