बिहार निजी स्कूलों में मनमानी वसूली पर प्रशासन ने लगाया ब्रेक -अब किताब और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीद सकेंगे अभिभावक

बिहार में निजी स्कूलों द्वारा किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी को लेकर की जा रही मनमानी वसूली पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। धारा-163 के तहत जारी आदेश में स्कूलों को किसी तय दुकान से सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालने से रोक दिया गया है। अब अभिभावक खुले बाजार से अपनी सुविधा अनुसार सामान खरीद सकेंगे। आदेश उल्लंघन पर जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

बिहार निजी स्कूलों में मनमानी वसूली पर प्रशासन ने लगाया ब्रेक -अब किताब और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीद सकेंगे अभिभावक
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बिहार के निजी स्कूलों पर अब प्रशासन की सीधी चोट पड़ी है।किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर चल रही सालों पुरानी ‘दुकानदारी’ पर जिला प्रशासन ने बड़ा ब्रेक लगा दिया है।अब अभिभावक अपनी मर्जी से, कहीं से भी—सस्ती और सुविधाजनक जगह से—किताबें और ड्रेस खरीद सकेंगे।दरअसल, लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से ही महंगे दामों पर सामान खरीदने को मजबूर कर रहे थे।स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों की मिलीभगत से किताबें, जूते और यूनिफॉर्म बाजार भाव से कई गुना महंगी बिक रही थीं।इसका सबसे ज्यादा बोझ गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा था।इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत सख्त आदेश जारी किया है।

अब कोई भी निजी स्कूल किसी एक दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकेगा।ऐसा करना सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन माना जाएगा।प्रशासन ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए साफ निर्देश दिए हैं कि हर निजी स्कूल को अपनी वेबसाइट और स्कूल परिसर में अनिवार्य किताबों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची सार्वजनिक करनी होगी।इतना ही नहीं, एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम तीन साल तक बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि हर साल अभिभावकों की जेब न कटे।यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे जिले में लागू कर दिया गया है।

नियमित निगरानी और औचक जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई स्कूल नियम तोड़ने की हिम्मत न करे।और अगर कोई स्कूल आदेश की अवहेलना करता है,तो भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-223 के तहत जुर्माने के साथ-साथ जेल तक का रास्ता खुल सकता है।इसमें स्कूल के प्राचार्य, संचालक और प्रबंधन समिति के सभी सदस्य व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।प्रशासन के इस फैसले से अभिभावकों में राहत की लहर है।लोगों को उम्मीद है कि अब शिक्षा के नाम पर हो रहा आर्थिक शोषण रुकेगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर सच में लगाम लगेगी।बिहार में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह फैसला एक बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है।