बरसात में 'स्वीमिंग पूल' बना लखीसराय का यह स्कूल, कंप्यूटर रूम डूबा, अफसर बेखबर!

लखीसराय के खगौर मॉडल हाई स्कूल की जर्जर हालत ने 500 छात्रों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। बारिश में छत से टपकता पानी और जलजमाव के बीच पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे। प्रशासन बेखबर।

बरसात में 'स्वीमिंग पूल' बना लखीसराय का यह स्कूल, कंप्यूटर रूम डूबा, अफसर बेखबर!
बरसात में 'स्वीमिंग पूल' बना लखीसराय का यह स्कूल, कंप्यूटर रूम डूबा, अफसर बेखबर!
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लखीसराय: बिहार के शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत आज भी डराने वाली है। ताजा मामला लखीसराय जिले के सदर प्रखंड का है, जहाँ खगौर गाँव में स्थित मॉडल हाई स्कूल खुद अपनी बदहाली के आँसू रो रहा है। स्कूल की जर्जर छत और टूटी हुई चहारदीवारी यहाँ पढ़ने वाले करीब 500 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए हर पल एक बड़ा खतरा बनी हुई है।

बरसात आते ही 'टापू' बन जाता है स्कूल

इस मॉडल हाई स्कूल में कुल 8 कमरे हैं, लेकिन बरसात का मौसम आते ही इनकी हालत किसी आपदा से कम नहीं होती।

  • टपकती छतें और डूबे कमरे: स्कूल की नींव कमजोर होने के कारण बारिश का पानी सीधे कमरों के अंदर भर जाता है।
  • खिड़कियों से आता पानी: जर्जर खिड़कियों के रास्ते बारिश की बौछारें क्लासरूम को तालाब बना देती हैं।
  • कंप्यूटर क्लास ठप: सबसे बुरा हाल कंप्यूटर क्लास रूम का है, जहाँ पानी भर जाने के कारण छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है।
  • परिसर में जलजमाव: स्कूल परिसर में मिट्टी भराई न होने की वजह से हल्की सी बारिश में भी पूरा कैंपस जलमग्न हो जाता है।

असुरक्षित माहौल में पढ़ने की मजबूरी : इस जानलेवा माहौल में न सिर्फ मासूम बच्चे बल्कि स्कूल के शिक्षक भी खौफ के साए में रहने को मजबूर हैं। जर्जर छत कब भरभराकर गिर जाए, इसका डर हमेशा बना रहता है।

प्रशासन की बेरुखी: न हेडमिस्ट्रेस मिलीं, न डीईओ के पास समय!

जब इस गंभीर समस्या को लेकर स्कूल प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो पता चला कि प्रधानाध्यापिका छुट्टी पर हैं। वहीं, जब जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से बात करनी चाही, तो वे किसी उद्घाटन समारोह में व्यस्त थे।

ग्रामीणों ने उठाए सवाल, कब जागेगा सिस्टम?

स्कूल की इस बदहाली से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर इस जर्जर स्कूल की सुध कब ली जाएगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की नींद कब टूटती है।