बिहार के किसानों की किस्मत बदलेगी: सिंदूर की खेती से लाखों की कमाई संभव – वैज्ञानिकों की क्रांतिकारी खोज

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने हाई जर्मिनेशन बीज विकसित कर सिंदूर की खेती में क्रांति ला दी है। अब पौधे समय से पहले सूखेंगे नहीं और किसान मुनाफा कमा सकते हैं। विश्वविद्यालय किसान को पौधे और तकनीकी सहायता भी देगा। यह पहल बिहार में खेती, आत्मनिर्भरता और आय बढ़ाने का नया अवसर साबित होगी।

बिहार के किसानों की किस्मत बदलेगी: सिंदूर की खेती से लाखों की कमाई संभव – वैज्ञानिकों की क्रांतिकारी खोज
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पटना,बिहार:बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने सिंदूर की खेती में ऐसा क्रांतिकारी शोध किया है, जिसे खेती की दुनिया में गेम चेंजर माना जा रहा है। अब तक सिंदूर की खेती जोखिम भरी और सीमित इलाकों तक ही संभव थी, क्योंकि पौधे समय से पहले सूख जाते थे या गिर जाते थे।

लेकिन बीएयू के वैज्ञानिकों ने हाई जर्मिनेशन बीज विकसित कर इस चुनौती को पूरी तरह पार कर लिया है। अब एक हजार से अधिक स्वस्थ पौधे तैयार हो चुके हैं, जिससे सिंदूर की खेती सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि मुनाफे का भरोसेमंद स्रोत बन गई है।

विश्वविद्यालय ने इसे केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा। राज्य के अलग-अलग जिलों में खेती को फैलाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। वैज्ञानिक खेतों तक पहुंचकर मार्गदर्शन देंगे और पौधों के विकास के बाद भी तकनीकी सहायता जारी रखेंगे।

बीएयू के कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय सिंदूर और फूड कलर उत्पादन पर पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। इसका उद्देश्य है राज्य को आयात पर निर्भरता से मुक्त करना और किसानों को नए लाभकारी विकल्प देना।

राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण है। यह शोध न केवल खेती में मुनाफा, बल्कि बिहार के किसानों की आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले समय में बिहार के खेतों में सिंदूर की खेती कृषि आधारित कारोबार का मजबूत मॉडल बन सकती है और किसानों की जिंदगी में खुशहाली का रंग भर सकती है।