बिहार में बच्चा चोर गिरोह, सरगना सहित पांच गिरफ्तार, लाखो में होता था सौदा

समस्तीपुर जंक्शन बच्चा चोरी कांड का खुलासा! जानिए कैसे 12 दिनों में रेल पुलिस ने 3.80 लाख में बिके बच्चे को बचाया और 5 आरोपियों को दबोचा।

बिहार में बच्चा चोर गिरोह, सरगना सहित पांच गिरफ्तार, लाखो में होता था सौदा
रेल थाना समस्तीपुर : अपहृत बच्चे को वापस माता-पिता को सौंपते हुए
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पुलिस ने इस मामले में दो कथित झोला छाप डॉक्टर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार करते हुए बच्चे की खरीद-बिक्री करने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया है।बरामदगी के बाद मासूम को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि मासूम का सौदा 3.80 लाख रुपये में किया गया था। बेटे की चाह में एक महिला ने बच्चे को खरीद लिया था।

गिरफ्तार आरोपितों में बच्चा चुराने वाली मोतिहारी के कजराहन निवासी शांति देवी, उसका साथ देने वाले मोतिहारी जिले के मधुबन थाना क्षेत्र के हरिनारायणपुर मुजाहिदा वार्ड-4 निवासी सन्नी साहनी, राजेपुर थाना क्षेत्र के काशी पकड़ी निवासी कथित झोलाछाप डॉक्टर सुनील कुमार, मेहसी थाना क्षेत्र के फुलकारिया निवासी झोलाछाप डॉक्टर विकास कुमार तथा बच्चा खरीदने वाली सारण जिले के चैनपुर तरैया निवासी सुमन देवी शामिल हैं। पुलिस ने अपहृत बालक को सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र स्थित बलुआ नारायणपुर गांव में सुमन देवी के घर से सकुशल बरामद किया। इसके बाद बच्चे को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया।

 वारदात की शुरुआत: सहयात्री बनकर कैसे जीता भरोसा?

14 जून की सुबह गोविंदपुर खजूरी के रहने वाले रंजीत राय अपनी पत्नी और 8 महीने के बेटे के साथ हैदराबाद जाने वाली ट्रेन पकड़ने समस्तीपुर जंक्शन पहुंचे थे। इसी दौरान मोतिहारी की शांति देवी और सन्नी साहनी ने उनसे बातचीत शुरू की।

झांसा: दोपहर में सन्नी ने दंपती को डराया कि हैदराबाद जाने वाली ट्रेन में भारी भीड़ है, जिसमें चढ़ना मुश्किल होगा।

साजिश: जब बच्चा सो गया और पिता किसी काम से स्टेशन से बाहर गए, तो सन्नी बच्चे की मां को भी झूठ बोलकर पति को खोजने के बहाने स्टेशन से दूर ले गया।

अपहरण: पीछे से मौका पाकर शांति देवी सो रहे बच्चे को गोद में उठाकर परीक्षा स्पेशल ट्रेन से मुजफ्फरपुर फरार हो गई।

₹3.80 लाख में हुआ सौदा, 4 जिलों में छापेमारी

पहला पड़ाव (मुजफ्फरपुर से मेहसी): मुजफ्फरपुर पहुंचने के बाद शांति देवी बस से मेहसी पहुंची। वहां सन्नी साहनी ने उसे 10 हजार रुपये का कमीशन दिया।

दूसरा पड़ाव (पहला डॉक्टर सुनील कुमार): बच्चे को मेहसी के एक कथित झोलाछाप डॉक्टर सुनील कुमार के घर पहुंचाया गया, जहां उसे रात भर छिपाकर रखा गया।

तीसरा पड़ाव (दूसरा डॉक्टर विकास कुमार): अगले दिन सुनील कुमार ने बच्चे को दूसरे झोलाछाप डॉक्टर विकास कुमार को सौंप दिया। विकास ने इसके बदले सुनील को 3 लाख रुपये दिए।

इसके बाद विकास कुमार ने बच्चे को सारण जिले की सुमन देवी के हवाले कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि सुमन देवी की पहले से तीन बेटियां हैं। पुत्र की चाह में उसने गिरोह के संपर्क में आकर 3.80 लाख रुपये देकर मासूम को खरीद लिया। पुलिस का कहना है कि इसी लालच ने उसे गंभीर अपराध का हिस्सा बना दिया। इधर 12 दिनों से बेटे की तलाश में भटक रहे माता-पिता को जब पुलिस ने उनके लाल को सकुशल सौंपा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार ने पुलिस टीम का आभार जताया। मासूम पूरी तरह सुरक्षित मिला, जिससे पुलिस ने भी राहत की सांस ली।

रेल थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया। स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस लगातार एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचती रही। समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और सारण सहित कई स्थानों पर लगातार छापेमारी की गई। आखिरकार पुलिस पूरे गिरोह तक पहुंचने में सफल रही । इस पूरे अभियान का नेतृत्व रेल थाना समस्तीपुर के थानाध्यक्ष बीरबल कुमार ने किया। पटना से NBC 24 के लिए अंकित कुमार की रिपोर्ट।