'होल्डिंग टैक्स भूमि का मालिकाना हक नहीं'—सुपौल मुख्य पार्षद ने उठाई कोसी पीड़ितों के लिए PM आवास की मांग

सुपौल में कोसी पुनर्वासित परिवारों को PM आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने उठाई मांग। जानें क्या है पूरा मामला।

'होल्डिंग टैक्स भूमि का मालिकाना हक नहीं'—सुपौल मुख्य पार्षद ने उठाई कोसी पीड़ितों के लिए PM आवास की मांग
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बिहार के सुपौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने कोसी पुनर्वासित परिवारों के हक में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि शहर के विभिन्न इलाकों में बसे इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का लाभ दिलाने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। राघवेंद्र झा ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर केंद्र और बिहार सरकार के वरीय अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के सामने भी अपनी मांग पुरजोर तरीके से रखी है।

नगर परिषद कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य पार्षद ने बताया कि सुपौल नगर परिषद के वार्ड संख्या 1, 14, 15 और 16 में बड़ी संख्या में कोसी पुनर्वासित परिवार रहते हैं। ये परिवार लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जब वे नियमित रूप से नगर परिषद को होल्डिंग टैक्स दे रहे हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?

राघवेंद्र झा ने इस समस्या की तकनीकी वजहों को स्पष्ट करते हुए कहा: "वर्तमान में पीएम आवास योजना के पोर्टल पर आवेदन करने के लिए भूमि स्वामित्व (जमीन की रसीद या दस्तावेज) होना अनिवार्य है। चूंकि ये पुनर्वासित परिवार वर्षों से यहाँ रह रहे हैं लेकिन इनके पास पारंपरिक मालिकाना दस्तावेज नहीं हैं, इसलिए ये इस योजना से वंचित हैं। सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर एक विशेष नीति बनाकर इन परिवारों को राहत देनी चाहिए।"

होल्डिंग टैक्स और पीएम आवास में क्या है अंतर?

मुख्य पार्षद ने इस दौरान होल्डिंग टैक्स को लेकर उठ रहे सवालों का भी तकनीकी जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2013 के तहत नगर परिषद क्षेत्र में आने वाले सभी भवनों पर टैक्स लगाया जाता है। यह टैक्स बिजली, सड़क, नाला, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए लिया जाता है।

उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा:

  • होल्डिंग टैक्स किसी भी व्यक्ति की जमीन का मालिकाना हक (स्वामित्व) तय नहीं करता है।
  • यह टैक्स केवल नागरिक सुविधाओं के संचालन के लिए लिया जाने वाला एक शुल्क है।
  • यह टैक्स उनके कार्यकाल में शुरू नहीं हुआ, बल्कि पूर्ववर्ती बोर्डों के समय से ही नियम के तहत वसूला जा रहा है।
  • इन वार्डों में ₹7.29 करोड़ के विकास कार्य

विपक्ष और आलोचकों को जवाब देते हुए मुख्य पार्षद ने विकास कार्यों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि नए नगर परिषद बोर्ड के गठन के बाद से अब तक केवल वार्ड 1, 14, 15 और 16 में लगभग 7 करोड़ 29 लाख रुपये की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और कई नए काम अभी भी प्रगति पर हैं।

राघवेंद्र झा ने सभी दलों और जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि कोसी पीड़ितों को पक्का मकान दिलाना सामाजिक न्याय और जनहित से जुड़ा मुद्दा है। इस पर राजनीति करने के बजाय सभी को मिलकर सरकार और संबंधित विभागों से इसका एक स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि दशकों से बसे इन परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।