Bihar Land Registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री होगी महंगी, कब से बढ़ेगा चार गुना तक शुल्क

बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ा झटका है। राज्य सरकार ने जमीन के सरकारी मूल्यांकन (सर्किल रेट) में भारी बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इसके चलते 1 अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री पर लगने वाला शुल्क 3 से 4 गुना तक बढ़ जाएगा। मार्च का महीना पुराने रेट पर रजिस्ट्री कराने का आखिरी मौका होगा।

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री होगी महंगी, कब से बढ़ेगा चार गुना तक  शुल्क
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पटना: बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह खबर बेहद अहम है। राज्य सरकार ने भूमि मूल्यांकन को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत 1 अप्रैल से पूरे बिहार में जमीन की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। सरकार के इस निर्णय से स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन चार्ज में 3 से 4 गुना तक की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। ऐसे में मार्च का महीना जमीन खरीदने वालों के लिए आखिरी राहत भरा मौका साबित हो सकता है।

सरकार का कहना है कि बीते कई वर्षों से जमीन के सरकारी मूल्यांकन में कोई संशोधन नहीं हुआ, जबकि बाजार में जमीन के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। इस अंतर के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी को देखते हुए अब सर्किल रेट को बाजार भाव के करीब लाने का निर्णय लिया गया है।

आसान शब्दों में समझें तो अब तक जिस जमीन की रजिस्ट्री पर करीब 10 हजार रुपये का स्टांप शुल्क लगता था, वही शुल्क 1 अप्रैल के बाद बढ़कर 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। यह नई दरें शहरी और ग्रामीण—दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू होंगी।

वर्तमान स्थिति यह है कि शहरी इलाकों में आवासीय जमीन का बाजार भाव 3 हजार से 5 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अब भी इसका मूल्यांकन 800 से 1000 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से होता है। वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मॉल, रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल और बड़े कार्यालय खुल चुके हैं। इन व्यावसायिक भूखंडों का बाजार मूल्य 5 से 7 हजार रुपये प्रति वर्गफीट है, लेकिन सरकारी रेट सिर्फ 1492 रुपये प्रति वर्गफीट दर्ज है।

सरकार को इस नए प्रस्ताव पर मंजूरी मिल चुकी है। नए मूल्यांकन के तहत ग्रामीण, आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक भूमि के साथ-साथ नेशनल हाईवे, मुख्य सड़क किनारे की जमीन, सिंचित-असिंचित और दियारा भूमि के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।

हालांकि इस फैसले के बाद आम जनता की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि बिहार में बड़ी आबादी गरीब और मध्यम वर्ग की है, जो जीवन भर की जमा-पूंजी से जमीन खरीदती है। ऐसे में रजिस्ट्री शुल्क में इतनी बड़ी बढ़ोतरी आम आदमी पर सीधा आर्थिक बोझ डालेगी। विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग स्लैब तय करने की मांग की है।

अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले पर जनता की प्रतिक्रिया को देखते हुए कोई राहत देती है या नहीं, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि 1 अप्रैल के बाद बिहार में जमीन खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो जाएगा।