बिहार: मोतीपुर चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की तैयारी तेज, 266 एकड़ जमीन वापस लेने का रास्ता साफ
बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने मेसर्स इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को 63 करोड़ 39 लाख 14 हजार 958 रुपये के भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मुजफ्फरपुर: बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने मेसर्स इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को 63 करोड़ 39 लाख 14 हजार 958 रुपये के भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद चीनी मिल की 266 एकड़ भूमि सरकार के कब्जे में वापस लेने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
सरकार का यह निर्णय आर्बिट्रेशन न्यायालय और पटना जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। स्वीकृत राशि का भुगतान इंडियन पोटाश लिमिटेड को किए जाने के बाद लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो जाएगा।
चीनी मिल के पुनरुद्धार को मिलेगी रफ्तार
मोतीपुर चीनी मिल कई वर्षों से बंद पड़ी है और इसकी जमीन को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। सरकार के ताजा फैसले को मिल के पुनर्जीवन और उत्तर बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इसके शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई जा रही है।
इससे पहले गन्ना उद्योग विकास विभाग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुजफ्फरपुर के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। विभाग के सचिव ने मोतीपुर चीनी मिल परिसर की उपलब्ध भूमि का विस्तृत ब्यौरा तैयार करने और मड़वन में नई चीनी इकाई की स्थापना के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश करने का निर्देश दिया था।
अधिकारियों को 50 से 100 एकड़ जमीन चिह्नित करने का लक्ष्य दिया गया है। इस कार्य की जिम्मेदारी विस्तार पदाधिकारी को सौंपी गई है, जिन्हें मड़वन और मोतीपुर अंचल कार्यालयों के साथ समन्वय स्थापित कर एक सप्ताह के भीतर भूमि संबंधी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
तिरहुत में गन्ना उद्योग को मिलेगा नया बल
वर्तमान में तिरहुत प्रमंडल में छह चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें पश्चिम चंपारण की बगहा, रामनगर, लौरिया, नरकटियागंज और मझौलिया के अलावा पूर्वी चंपारण की सुगौली चीनी मिल शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मोतीपुर चीनी मिल दोबारा शुरू होती है और मड़वन में नई चीनी इकाई स्थापित होती है, तो तिरहुत क्षेत्र में गन्ना उद्योग को नई मजबूती मिलेगी। इससे गन्ने की खेती का रकबा बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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