अजगैबीनाथ धाम में नेपाल-बंगाल के कांवरियों की भारी भीड़, अधूरे इंतजामों को लेकर फूटा गुस्सा

सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम में बंगला श्रावणी मेला शुरु होते ही बंगाल और नेपाल के कावरियों के ब्झारी भीड़ उमड़ी | अंधेरो घंटो पर स्नान करने को मजबूर श्रद्धालु, प्रशाशनपर उठे सवाल|

अजगैबीनाथ धाम में नेपाल-बंगाल के कांवरियों की भारी भीड़, अधूरे इंतजामों को लेकर फूटा गुस्सा
नेपाल और बंगाल के कांवरियों की भारी भीड़
Image Slider
Image Slider
Image Slider

भागलपुर (सुल्तानगंज)। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में भले ही अभी 11 दिन शेष हैं, लेकिन सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट (अजगैबीनाथ धाम) पर आस्था का सैलाब अभी से उमड़ पड़ा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल और नेपाल में बांग्ला श्रावणी मेला 17 जुलाई से शुरू हो चुका है, जिसके कारण भारी संख्या में विदेशी और अंतरराज्यीय श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम पहुंचने लगे हैं।  

गंगा घाट पर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के गगनभेदी जयकारों के साथ कांवरिया पवित्र गंगाजल उठाकर पैदल और वाहनों से बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए रवाना हो रहे हैं।

एक तरफ जहां श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांवरियों और स्थानीय पुजारियों ने बताया कि नेपाल और बंगाल का मेला शुरू हो चुका है, लेकिन अजगैबीनाथ गंगा घाट पर अब तक लाइट की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है।

घाटों पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण तड़के और देर शाम आने वाले कांवरिया घने अंधेरे में स्नान करने को मजबूर हैं। गंगा घाट से लेकर कच्ची कांवरिया पथ तक कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं, जिससे श्रद्धालुओं को अंधेरे में ही देवघर के लिए कूच करना पड़ रहा है।

स्थानीय प्रशासन का दावा है कि मुख्य श्रावणी मेले को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं और कांवरिया पथ पर दिन-रात काम चल रहा है। लेकिन असमय उमड़ी इस भारी भीड़ के सामने प्रशासनिक इंतज़ाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। लाइटिंग, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर अभी भी भारी कमी देखने को मिल रही है, जिससे तीर्थयात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  

भक्तों का कहना है कि प्रशासन को पता था कि बांग्ला श्रावणी मेला पहले शुरू हो जाता है, ऐसे में घाटों और रास्तों पर रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्था समय से पहले पूरी हो जानी चाहिए थी।