दानापुर कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जेल ले जाते समय चीखने लगे पिता-पुत्र, पुलिस पर लगाया 'फर्जी एनकाउंटर' की साजिश का सनसनीखेज आरोप

पटना के नौबतपुर में होटल संचालक और उसके पिता को जेल ले जाते समय दानापुर कोर्ट परिसर में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा! पुलिस पर लगाया एनकाउंटर की साजिश का आरोप। पढ़ें पूरी खबर।

दानापुर कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जेल ले जाते समय चीखने लगे पिता-पुत्र, पुलिस पर लगाया 'फर्जी एनकाउंटर' की साजिश का सनसनीखेज आरोप
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पटना (दानापुर) : पटना के नौबतपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार होटल संचालक और उसके पिता को जब पुलिस दानापुर व्यवहार न्यायालय में पेशी के बाद जेल ले जाने लगी, तो कोर्ट परिसर अचानक रणक्षेत्र में बदल गया। आरोपियों ने पुलिस वैन में बैठने से इनकार करते हुए बीच सड़क पर जमकर हंगामा किया, जिससे कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आरोपियों ने चिल्ला-चिल्लाकर पुलिस पर उनके 'फर्जी एनकाउंटर' की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा मामला 12 जुलाई की रात का है। नौबतपुर एम्स रोड स्थित मोतीपुर गांव के पास 'रॉक्स रेस्टोरेंट' में देर रात ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेस्टोरेंट संचालक सूरज कुमार और उनके पिता राजीव कुमार को गिरफ्तार किया था। बुधवार को जब दोनों को दानापुर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा जा रहा था, तब यह हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया।

हंगामे के दौरान आरोपित पिता-पुत्र ने चिल्लाते हुए पुलिस की पूरी कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े किए। उनका कहना था:

वे पूरी तरह निर्दोष हैं और घटना की रात (12 जुलाई) वे खुद पुलिस के पास मदद मांगने और शिकायत दर्ज कराने गए थे। पुलिस ने उनकी सुनने के बजाय उन्हें ही इस पूरे केस में मुख्य आरोपी बना दिया। उन्हें 12 जुलाई की रात से ही गैर-कानूनी तरीके से थाने में बंद रखा गया था और अब पुलिस उनका फर्जी एनकाउंटर करने की फिराक में है।

"हमें फंसाया गया है! हम न्याय मांगने थाने गए थे और पुलिस ने हमें ही हवालात में डाल दिया। अब ये लोग हमारा फर्जी एनकाउंटर करना चाहते हैं!" - कोर्ट परिसर में चिल्लाते आरोपित

दूसरी तरफ, नौबतपुर थानाध्यक्ष मंजीत कुमार ठाकुर ने आरोपितों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। थानाध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि गिरफ्तार सूरज कुमार और राजीव कुमार इलाके में अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट परिसर और जेल ले जाते समय हंगामा करना पुलिस पर दबाव बनाने और कानूनी कार्रवाई से बचने का एक सोचा-समझा हथकंडा है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और कोर्ट के आदेश पर दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।