फीफ़ा वर्ल्ड कप के खिलाड़ी छेद वाली मोज़े पहने हुए हैं।
खिलाड़ी अपनी पिंडलियों पर दबाव कम करने के लिए मोजों में छेद कर लेते हैं। आधुनिक फुटबॉल मोजे अक्सर तंग और चुभने वाले होते हैं। खिलाड़ी विशेषकर वे जिनकी पिंडलियाँ बड़ी और विकसित होती हैं ।
FIFA वर्ल्ड कप के खिलाड़ी अपनी मोज़ों में छेद करते हैं ताकि कसाव कम हो, पिंडली की मांसपेशियों (calf muscles) पर शारीरिक दबाव कम हो और मैच के बीच में ऐंठन (cramping) न हो। भले ही यह मैदान पर अजीब लगे, लेकिन यह काम का बदलाव टॉप लेवल पर खेलने वाले बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच एक बड़ा ट्रेंड बन गया है।
इस ट्रेंड के मुख्य कारण:
दबाव कम करना: आजकल किट बनाने वाली कंपनियाँ अक्सर मैच के लिए आधिकारिक मोज़े बहुत कसकर बनाती हैं, जो घने सिंथेटिक पॉलिएस्टर से बने होते हैं ताकि शिन गार्ड अपनी जगह पर मजबूती से टिके रहें। हालाँकि, जिन खिलाड़ियों की पिंडली की मांसपेशियाँ बहुत विकसित या उभरी हुई होती हैं, उनके लिए यह कसा हुआ कपड़ा बहुत ज़्यादा रुकावट पैदा करता है।
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करना: फुटबॉलरों को आमतौर पर हर मैच से ठीक पहले बिल्कुल नए, बिना खिंचे हुए मोज़े दिए जाते हैं। खास जगहों पर कट लगाने या "स्विस चीज़" जैसा लुक बनाने से कपड़ा फैल जाता है; खिलाड़ियों का मानना है कि इससे 90 मिनट से ज़्यादा समय तक तेज़ दौड़ने के दौरान पैरों में ब्लड सर्कुलेशन और हवा का आना-जाना (breathability) बेहतर होता है।
मांसपेशियों की थकान रोकना: बेहतरीन खिलाड़ी इस कस्टम बदलाव का इस्तेमाल तनाव कम करने और मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन, भारीपन या अचानक होने वाली ऐंठन से बचने के लिए करते हैं।
असलियत: भले ही खिलाड़ी ढीले फिटिंग वाले मोज़ों से मिलने वाले मानसिक आराम और तुरंत राहत की बात करते हों, लेकिन फिजिकल थेरेपिस्ट का कहना है कि मोज़े काटने को चोट से बचाने का वैज्ञानिक तरीका मानने के लिए बहुत कम या कोई मेडिकल सबूत नहीं है।
मोज़ों में बदलाव करने वाले कुछ मशहूर खिलाड़ी: जूड बेलिंगहम (इंग्लैंड), बुकायो साका (इंग्लैंड), नेमार (ब्राज़ील), काइल वॉकर (इंग्लैंड), लेरॉय साने (जर्मनी)।
"ग्रिप सॉक" कट से अलग: ध्यान देने वाली बात यह है कि आप खिलाड़ियों को अपने मोज़े टखने (ankle) के पास से पूरी तरह आधा काटते हुए भी देखेंगे। यह एक बिल्कुल अलग ट्रिक है जिसमें खिलाड़ी फैक्ट्री से बने मोज़े के निचले हिस्से (पैर वाले हिस्से) को काट देते हैं ताकि वे अपने बूट के अंदर अच्छी पकड़ वाले, एंटी-स्लिप ग्रिप सॉक्स पहन सकें और बाकी बचे टीम सॉक्स को आस्तीन (sleeve) की तरह अपनी पिंडली पर चढ़ा सकें, ताकि FIFA के सख्त यूनिफॉर्म नियमों का पालन हो सके। NBC 24 के लिए पटना से अफ़ीफ़ा निज़ामी की रिपोर्ट।