62 साल पुराना देशभक्ति गीत जिसे मिला राष्ट्रगान जैसा सम्मान, आज भी आंखें नम कर देता है ‘कर चले हम फ़िदा’
हिंदी सिनेमा में कई देशभक्ति गीत बने, लेकिन कुछ गाने समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो’, जो 1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘हकीकत’ का हिस्सा है।
Entertainment Desk: हिंदी सिनेमा में कई देशभक्ति गीत बने, लेकिन कुछ गाने समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो’, जो 1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘हकीकत’ का हिस्सा है। 62 साल बाद भी यह गीत हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की वही भावना जगाता है। यही वजह है कि इसे वर्षों तक राष्ट्रगान जैसा सम्मान मिला और इसे CBSE की कक्षा 10 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘स्पर्श-2’ में भी शामिल किया गया।
1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी थी ‘हकीकत’
निर्देशक चेतन आनंद की फिल्म ‘हकीकत’ 1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित थी। फिल्म में भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और युद्ध की वास्तविकता को बेहद भावुक अंदाज में दिखाया गया। यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ युद्ध फिल्मों में गिनी जाती है।
‘कर चले हम फ़िदा’ बना अमर देशभक्ति गीत
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत ‘कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो’ आज भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, शहीद दिवस और सेना से जुड़े कार्यक्रमों में पूरे सम्मान के साथ बजाया जाता है।
इस गीत को कैफी आज़मी ने लिखा, मदन मोहन ने संगीत दिया और महान गायक मोहम्मद रफ़ी ने अपनी भावपूर्ण आवाज़ से इसे अमर बना दिया। गीत के बोल आज भी शहीद सैनिकों के बलिदान की याद दिलाते हैं और सुनने वालों की आंखें नम कर देते हैं।
दमदार स्टारकास्ट ने बनाई फिल्म को यादगार
फिल्म ‘हकीकत’ में धर्मेंद्र, बलराज साहनी, प्रिया राजवंश, विजय आनंद समेत कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। शानदार अभिनय, भावनात्मक कहानी और संगीत ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया।
चेतन आनंद की यादगार फिल्में
चेतन आनंद भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में रहे जिन्होंने देशभक्ति और संवेदनशील विषयों पर यादगार फिल्में बनाईं। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं:
* नीचा नगर (1946): कान फिल्म फेस्टिवल का ग्रैंड प्रिक्स जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म।
* हकीकत (1964): भारत-चीन युद्ध पर आधारित राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म।
* आखिरी खत (1966): राजेश खन्ना की शुरुआती फिल्मों में से एक।
* हीर रांझा (1970): पूरी तरह काव्यात्मक संवादों में बनी अनोखी फिल्म।
* हिंदुस्तान की कसम (1973): भारत-पाक युद्ध पर आधारित युद्ध फिल्म।
* कुदरत (1981): राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, राजकुमार और हेमा मालिनी अभिनीत चर्चित फिल्म।
टीवी पर भी दिखाई वीर जवानों की कहानियां
फिल्मों के बाद चेतन आनंद ने टेलीविजन का रुख किया और 1988 में ‘परम वीर चक्र’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिक का निर्माण किया। इस शो के माध्यम से दर्शकों ने भारत के वीर सैनिकों की बहादुरी और बलिदान की सच्ची कहानियों को करीब से देखा।
आज भी ‘कर चले हम फ़िदा’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि दशकों बाद भी इसकी लोकप्रियता और सम्मान में कोई कमी नहीं आई है।
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