मोतिहारी कोर्ट ने पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी को किया बाइज्जत बरी, साक्ष्य के अभाव में मिली राहत

मोतिहारी के विशेष न्यायालय (एक्साइज) ने सुगौली विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र तिवारी को एक्साइज एक्ट से जुड़े मामले में साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद तिवारी ने मामले को राजनीतिक साजिश बताया, जबकि उनके अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मोतिहारी कोर्ट ने पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी को किया बाइज्जत बरी, साक्ष्य के अभाव में मिली राहत
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मोतिहारी: मोतिहारी के विशेष न्यायालय (एक्साइज) ने सुगौली विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र तिवारी को एक्साइज एक्ट से जुड़े मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।

जानकारी के अनुसार, सुगौली थाना कांड संख्या 475/25 के तहत जितेंद्र तिवारी पर सोशल मीडिया पर कथित रूप से शराब के प्रचार-प्रसार से संबंधित वीडियो वायरल करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

जितेंद्र तिवारी के अधिवक्ता ने बताया कि जिस वीडियो को पुलिस ने साक्ष्य के रूप में पेश किया था, वह नेपाल में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत का वीडियो था। अधिवक्ता के अनुसार, इसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया, जहां वे 111 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिली और अब अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया।

न्यायालय से दोषमुक्त होने के बाद जितेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चीनी मिल चालू कराने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया था। उनका दावा है कि इसके बाद उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका नाम भूमाफिया की सूची में शामिल किया गया और उनके खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट के तहत जिला बदर की अनुशंसा भी की गई थी।

वहीं, अदालत के फैसले के बाद उनके अधिवक्ता ने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जितेंद्र तिवारी को दोषमुक्त करार दिया है। मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मोतिहारी कोर्ट ने पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी को किया बाइज्जत बरी, साक्ष्य के अभाव में मिली राहत

Summary: मोतिहारी के विशेष न्यायालय (एक्साइज) ने सुगौली विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र तिवारी को एक्साइज एक्ट से जुड़े मामले में साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद तिवारी ने मामले को राजनीतिक साजिश बताया, जबकि उनके अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मोतिहारी: मोतिहारी के विशेष न्यायालय (एक्साइज) ने सुगौली विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र तिवारी को एक्साइज एक्ट से जुड़े मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।

जानकारी के अनुसार, सुगौली थाना कांड संख्या 475/25 के तहत जितेंद्र तिवारी पर सोशल मीडिया पर कथित रूप से शराब के प्रचार-प्रसार से संबंधित वीडियो वायरल करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

जितेंद्र तिवारी के अधिवक्ता ने बताया कि जिस वीडियो को पुलिस ने साक्ष्य के रूप में पेश किया था, वह नेपाल में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत का वीडियो था। अधिवक्ता के अनुसार, इसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया, जहां वे 111 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिली और अब अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया।

न्यायालय से दोषमुक्त होने के बाद जितेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चीनी मिल चालू कराने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया था। उनका दावा है कि इसके बाद उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका नाम भूमाफिया की सूची में शामिल किया गया और उनके खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट के तहत जिला बदर की अनुशंसा भी की गई थी।

वहीं, अदालत के फैसले के बाद उनके अधिवक्ता ने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जितेंद्र तिवारी को दोषमुक्त करार दिया है। मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।