बिहार का शोक कोसी का रौद्र रूप: बारिश से बढ़ा जलस्तर, उजड़ने लगे गांव, पलायन को मजबूर लोग
नेपाल में बारिश से कोसी नदी का जलस्तर बढ़ा, 1.76 लाख क्यूसेक से ज्यादा डिस्चार्ज। किसनपुर के बेला गोठ सहित कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, पलायन शुरू।
सुपौल | किसनपुर : नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार भारी बारिश ने एक बार फिर बिहार में कोसी नदी के तटबंध के अंदर रहने वाले हजारों परिवारों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। कोसी नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है, जिससे तटबंध के भीतर बसे गांवों में खौफ का माहौल है।
कोसी बराज से 1.76 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कोसी बराज से नदी में पानी का डिस्चार्ज आज 1 लाख 76 हजार 855 क्यूसेक दर्ज किया गया है। भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का दबाव सीधे तौर पर तटबंध के अंदरूनी इलाकों पर पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति सुपौल जिले के किसनपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बेला गोठ और आसपास की पंचायतों की है, जहां तेजी से कटाव हो रहा है।
बेला गोठ गांव से आ रही तस्वीरें बेहद डराने वाली हैं। कोसी नदी के तेज बहाव में ग्रामीणों के घर लगातार कटकर विलीन हो रहे हैं। अपनी आंखों के सामने आशियाना टूटता देख लोग आनन-फानन में अपने घरों को खुद ही उजाड़ रहे हैं। प्रभावित लोग अपने जरूरी सामान, मवेशी और अनाज समेटकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। सड़क संपर्क टूटने के कारण बाढ़ प्रभावित लोग नावों के सहारे अपनी गृहस्थी का सामान ढोने और सुरक्षित इलाकों में शरण लेने को मजबूर हैं।
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, कोसी नदी के जलस्तर में अभी और वृद्धि होने की पूरी संभावना है। ऐसे में तटबंध के अंदर बसे अन्य गांवों पर भी डूबने का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखने का दावा तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर पीड़ितों के बीच खौफ और बेबसी साफ देखी जा सकती है।