जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचेगा विकास का रोडमैप, 24 जिलों में संवाद से सामने आएंगी स्थानीय जरूरतें
राज्य के जनजातीय समुदायों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को समझकर विकास की दिशा तय करने की पहल तेज कर दी गई है। बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (बीएसटीआरटीआई) की ओर से प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 24 चिन्हित जिलों में सम्मेलन-सह-संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
पटना: राज्य के जनजातीय समुदायों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को समझकर विकास की दिशा तय करने की पहल तेज कर दी गई है। बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (बीएसटीआरटीआई) की ओर से प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 24 चिन्हित जिलों में सम्मेलन-सह-संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन सम्मेलनों के माध्यम से जनजातीय समुदायों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को सामने लाया जा रहा है, ताकि संबंधित विभागों और हितधारकों के समन्वय से इनके समाधान की ठोस पहल की जा सके।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका से लेकर संस्कृति और आधारभूत सुविधाओं तक पर मंथन
- जनजातीय समुदायों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, बिहार सरकार अंतर्गत कराए जा रहे इन सम्मेलनों का फोकस केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय समुदायों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से दिलाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली स्थानीय चुनौतियों को दूर करने पर भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका, कौशल विकास, आवास, पेयजल, सड़क, बिजली, सामाजिक सुरक्षा, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर समुदाय के प्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।
चार जिलों में हो चुके सम्मेलन
अभियान के तहत अब तक सुपौल, नवादा, रोहतास एवं पूर्वी चंपारण जिलों में सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से जनजातीय शिक्षा, रोजगार एवं आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।
इन सम्मेलनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर प्राप्त सुझावों और समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई और बेहतर विभागीय समन्वय की दिशा में पहल की जा रही है। शेष चिन्हित जिलों में भी इसी क्रम में सम्मेलन एवं संगोष्ठियों का आयोजन कराया जा रहा है।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर बनेगी विकास की दिशा
जनजातीय समुदायों के विकास के लिए यह जरूरी है कि योजनाओं का निर्धारण और क्रियान्वयन स्थानीय परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए। इसी उद्देश्य से आयोजित इन सम्मेलनों में समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों से सीधे संवाद के जरिए यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें किन क्षेत्रों में सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता है और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कहां कठिनाइयां आ रही हैं।
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