इक़बाल और नदवी छात्रावास के छात्रों को जानबूझकर निशाना बना रहा प्रशासन

भाकपा-माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, मीडिया इंचार्ज कुमार परवेज और पुनीत पाठक ने आज पटना विश्वविद्यालय के इक़बाल और नदवी छात्रावास का दौरा किया, जहाँ दो दिन पहले रात के अंधेरे में पुलिस द्वारा छात्रों को गिरफ्तार किया गया था.

इक़बाल और नदवी छात्रावास के छात्रों को जानबूझकर निशाना बना रहा प्रशासन
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पटना, 9 मई 2026ः भाकपा-माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, मीडिया इंचार्ज कुमार परवेज और पुनीत पाठक ने आज पटना विश्वविद्यालय के इक़बाल और नदवी छात्रावास का दौरा किया, जहाँ दो दिन पहले रात के अंधेरे में पुलिस द्वारा छात्रों को गिरफ्तार किया गया था.

महबूब आलम ने कहा कि सम्राट चौधरी के शासन में मुस्लिम छात्रों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पटना कॉलेज कैंपस में पीरबहोर थाने से नियुक्त अधिकारी अरविंद पांडे द्वारा छात्रों को धमकी दी गई कि “गोली पैर में नहीं, छाती में मारी जाएगी.”

उन्होंने कहा कि जिस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया — एक युवक की हत्या और उसकी पत्नी पर जानलेवा हमला — उसके खिलाफ छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने इंसाफ की मांग उठाई थी. लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस जायज़ गुस्से और लोकतांत्रिक विरोध को समझने के बजाय दमन का रास्ता चुना.

7 मई की रात इक़बाल हॉस्टल में पुलिस की छापेमारी और छात्रों की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि प्रशासन विरोध की आवाज़ को अपराध की तरह पेश करना चाहता है. पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करने वाले छात्रों को ही निशाना बनाया गया. 10 छात्रों की गिरफ्तारी और उनमें से 3 को बेउर जेल भेजना न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है. यह कार्रवाई छात्रों के बीच डर और खामोशी थोपने की कोशिश है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

भाकपा-माले नेताओं ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी इक़बाल हॉस्टल के एक छात्र को कैंपस में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के कारण 20 दिनों तक बेउर जेल में रखा गया था. लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयाँ इस ओर इशारा करती हैं कि एक खास समुदाय के छात्रों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि बिहार में नई सरकार बनने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस तरह की घटनाएँ गंभीर सवाल खड़े करती हैं. इससे यह आशंका पैदा होती है कि अल्पसंख्यक छात्रों को दबाने और उन्हें हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है.

भाकपा-माले ने मांग की कि सभी गिरफ्तार छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए तथा पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए. पार्टी ने कहा कि छात्र समुदाय अन्याय और दमन के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाता रहेगा. इंसाफ की मांग करना कोई जुर्म नहीं है और इसे दबाने की हर कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा.पटना से एनबीसी 24 के लिए कुमार गौतम की रिपोर्ट।