मंत्री बनने के बाद पहली बार पटना साहिब पहुंचे शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, तख्त श्री हरमंदिर जी में टेका मत्था, कोचिंग शिक्षक से शिक्षा मंत्री तक का सफर
बिहार सरकार के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरमंदिर पहुंचे....और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने शिक्षा मंत्री को सॉल और स्वरूपा भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री के स्वागत को लेकर गुरुद्वारा परिसर में विशेष उत्साह देखा गया। बता दें कि बिहार में नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में 32 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, जिसमें मिथिलेश तिवारी को भी शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंत्री पद ग्रहण करने के बाद उनकी इच्छा थी कि वे पटना साहिब पहुंचकर गुरु महाराज का आशीर्वाद लें। उन्होंने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार काम करेगी।
वहीं शुक्रवार को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर मंत्री ने फिलहाल टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस विषय पर बाद में बात की जाएगी।
कोचिंग शिक्षक से शिक्षा मंत्री तक का सफर
बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत पटना में शिक्षक के रूप में की। गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड अंतर्गत डुमरिया निवासी देवनारायण तिवारी के पुत्र मिथिलेश तिवारी के पिता देवनारायण तिवारी पटना में पीडब्लूडी विभाग में कर्मी थे। मिथिलेश तिवारी ने पटना में रहकर अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स किया और अपने शुरुआती जीवन में कुछ समय के लिए पटना में कोचिंग भी चलाते रहे और अब शिक्षा मंत्री बने।
कौन हैं मिथिलेश तिवारी
मिथिलेश तिवारी 1988 में एबीवीपी से जुड़े और 1990 में भारतीय जनता पार्टी से सक्रिय राजनीति में आए। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लगातार पार्टी में कई जिम्मेदारियों को निभाया है। राजद के शासन में पहली बार भाजपा ने मिथिलेश तिवारी को कटेया विधानसभा सीट से 2005 के फरवरी में उम्मीदवार बनाया। बसपा के उम्मीदवार रहे अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से उनका मुकाबला रहा, लेकिन उन्हें चुनाव हारना पड़ा।
उसके बाद 2015 में जदयू और भाजपा जब अलग चुनाव मैदान में आये तो बैकुंठपुर से भाजपा ने भरोसा जताते हुए मिथिलेश तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। तब जदयू -राजद को पीछे छोड़कर उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की। 2020 के चुनाव में एनडीए ने बैकुंठपुर से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन इस बार उन्हें जीत नहीं मिल सकी।वर्ष 2025 में हुए चुनाव में मिथिलेश तिवारी ने राजद को हरा कर परचम लहराया था। पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है. उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है।अपनी व्यवहार कुशलता, वाकपटुता और प्रखर वक्ता की छवि के कारण उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ बनाई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया। समय के साथ पार्टी में उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए उन्हें जाना और पहचाना जाने लगा, जिसका परिणाम आज मंत्री पद के रूप में सामने आया।
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