यूक्रेन के कीव में फसीं हैं दो भारतीय लड़कियां, धमाकों की आवाज़ के बीच लगा रहीं मदद की गुहार

रूस की सेना यूक्रेन पर मिसाइल से ताबड़तोड़ हमले कर रही है। ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया अब त्सेरे विश्व युद्ध की कगार पर है।इस हमले से यूक्रेन में पढ़ाई करने गए हजारों भारतीय बच्चे की जान संकट में आ गई है।

यूक्रेन के कीव में फसीं हैं दो भारतीय लड़कियां, धमाकों की आवाज़ के बीच लगा रहीं मदद की गुहार
NBC24 DESK: रूस की सेना यूक्रेन पर मिसाइल से ताबड़तोड़ हमले कर रही है। ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया अब त्सेरे विश्व युद्ध की कगार पर है।इस हमले से यूक्रेन में पढ़ाई करने गए हजारों भारतीय बच्चे की जान संकट में आ गई है। हमले के बाद यूक्रेन को नो फ्लाइट जोन घोषित कर दिया गया है। इससे वहां फंसे सभी बच्चों की मदद के रास्ते बंद हो गए हैं। राजस्थान के जोधपुर की रहने वाले नरेश भाटी की बेटी नेहा अपनी दोस्त सुरभि श्रीवास्तव के साथ यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसी हुई हैं। 'अमर उजाला' से हुई बातचीत में नेहा और सुरभि ने बताया कि पुलिस ने हमें बाहर जाने से मना कर दिया है। इंडियन एम्बेसी से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। बार-बार हमें धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। दोनों ने इंडियन एम्बेसी और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। इधर, नेहा के पिता नरेश भाटी और उनकी पत्नी संतोष भाटी का रो-रो कर बुरा हाल है। नेहा और सुरभि ने तारास शेवचेंको नेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करती हैं। उन्होंने बताया कि हमले के बाद से यहां के सभी मार्केट और शॉपिंग मॉल बंद कर दिए गए हैं। सुबह छह बजे के बाद से तीन बार इमरजेंसी सायरन बज चुका है। कई बार धमाकों की आवाज भी सुनाई दी है। उन्होंने बताया कि यहां की सड़कों पर पुलिस और सेना की गाड़ियां घूम रही हैं। किसी को भी घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं हैं।   हॉस्टल में कैद हैं दोनों छात्राएं नेहा ने बताया कि यूक्रेन सरकार की तरफ से एक नोट जारी कर सभी को अपने स्थान पर रहने के लिए कहा गया है। हम अभी अपने हॉस्टल में रह रहे हैं। अगर जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो खाने-पीने की चीजों को लेकर भी समस्या होने लगेगी। दोनों छात्राओं ने कहा कि भारत सरकार जल्द से जल्द हमें यहां से निकाल कर सुरक्षित घर पहुंचाए। नेहा की मां संतोष भाटी ने रुंधे गले और आंखों से आंसू पोछते हुए कहा कि दोनों देशों की लड़ाई में जनता का नुकसान हो रहा है। दोनों देशों की सरकारें आपस में बैठकर समझौता कर लें, इस तरह आम लोगों की जिंदगी को खतरे में क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि हमले के बीच फंसी मेरी बेटी और अन्य बच्चों को बचाने के लिए इंडियन एम्बेसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या कर रहे हैं, क्या उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है? उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे हॉस्टल में बंद होकर बैठे हैं, वहां उन्हें खाना-पीना भी नहीं मिल पा रहा है। बमबारी के बीच उनकी जान जोखिम में है और यहां हमारे हालात खराब हैं। मैं सरकार से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि हमारे बच्चों के लिए कुछ करे।