सभी पंचायतों के मुखिया का बढ़ा टेंशन, जीएसटी नंबर लेने के बाद ही कर पाएंगे योजनाओं के राशि का भुगतान....

सरकारी योजनाओं के लिए डिजिटल भुगतान आते ही योजनाओ की रफ़्तार कम हैं। और पंचायत की सरकार को लगभग सात महीने हो गए हैं, लेकिन विकास योजना अब तक वैसी ही है।

सभी पंचायतों के मुखिया का बढ़ा टेंशन, जीएसटी नंबर लेने के बाद ही कर पाएंगे योजनाओं के राशि का भुगतान....

सहरसा : राज्य में जीएसटी नंबर को लेकर सभी मुखिया की बढ़ी परेशानी। अब उनके लिए जीएसटी नंबर लेना अनिवार्य होगा, तभी वो भुगतान कर पाएंगे। असल में, सरकारी योजनाओं के लिए डिजिटल भुगतान आते ही योजनाओ की रफ़्तार कम हैं। और पंचायत की सरकार को लगभग सात महीने हो गए हैं, लेकिन विकास योजना अब तक वैसी ही है।

जबकि, पहले सरकारी प्रावधान के तहत प्रखंड में विकास योजनाओं के संचालन को लेकर एक पद बीपीआरओ सृजित किया गया। हालांकि, बाद में बीडीओ को योजना संचालन का प्रभार दे दिया गया। इस बीच योजनाओं की राशि भुगतान को लेकर डिजिटल भुगतान के लिए डोंगल बनवाए गए हैं।

बता दें कि, मुखिया के लिए GST नंबर भी बड़ी परेशानी बन गई हैं।बीडीओ को प्रभार मिलने के एक महीने बाद सरकार ने 15 दिन पहले निर्देश जारी किया कि सभी निकासी और व्ययन पदाधिकारी को जीएसटी नंबर लेना होगा। बगैर इसके वो किसी योजना का भुगतान नहीं कर सकेंगे। वही, जब से नए निर्देश जारी किए गए हैं, तब से लेकर अभी तक प्रखंड के 19 पंचायत में से महज महिसरहो पंचायत की मुखिया ने ही जीएसटी नंबर प्राप्त किया हैं। 

मालूम हो कि, बीडीओ के जीएसटी नंबर के लिए आवेदन कर दिया गया है। हालांकि, यह फिलहाल प्रोसेस में है। और ऐसे में पंचायतों और प्रखंड में राशि की उपलब्धता के बाद पहले के ही योजनाओ के लिए भुगतान नहीं हो पाया हैं। मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रखंड में पंसस के विकास कार्य के लिए 15वीं वित्त मद में तीन करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध है। इसे लेकर बीडीओ विनय मोहन झा ने बताया कि, सभी जनप्रतिनिधियों को जल्द से जल्द जीएसटी नंबर प्राप्त करने को कहा गया हैं।